चुनावी चौपाल 2022 : पहले सूची जारी कर बाजी तो मार ली, असंतोष से कैसे निबटेंगी भाजपा

चुनावी चौपाल 2022 : पहले सूची जारी कर बाजी तो मार ली, असंतोष से कैसे निबटेंगी भाजपा

इटारसी। भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। अब कांग्रेस का इंतजार है। कांग्रेस में स्थानीय कमेटी की अपेक्षा आलाकमान के पाले में गेंद है।

बावजूद इसके कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों ने नाम-निर्देशन पत्र भरना शुरु कर दिया है।
चुनावी चौपाल में आज वार्ड क्रमांक पांच और छह की बात करेंगे। वार्ड 5 में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व पार्षद श्रीमती लक्ष्मी गालर को मैदान में उतार दिया है, जबकि कांग्रेस से रमा अरविंद चंद्रवंशी ने दावेदारी जतायी है। उनके पति अरविंद चंद्रवंशी इससे पहले पार्षद रहे हैं। अरविंद चंद्रवंशी का कहना है कि जब वे पार्षद बने थे तो यह क्षेत्र प्यासा नगर के नाम से जाना जाता था, उन्होंने इसे चुनौती माना और प्यासानगर जैसा कलंक हटाकर यहां पानी की पर्याप्त व्यवस्था कर दी है, हरघर में पर्याप्त पानी है। इसके अलावा ड्रेनेज की बड़ी समस्या थी, बड़ी छोटी नालियां बनाकर इस समस्या का 90 फीसदी समाधान किया। रोड काफी चौड़ी हैं, पिछली गलियों में नालियां बनायी और आगे ड्रेनेज का सिस्टम नहीं रखा। करीब एक करोड़ रुपए से अधिक के कार्य कराये हैं। इन सभी कामों के साथ और आगामी समय में शिवराजपुरी में ड्रेनेज सिस्टम रह गया वहां के लिए मास्टर प्लान बनाया है और एक पार्क बनाने की योजना के साथ चुनाव में जा रहे हैं। जहां तक भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी की बात करें तो वे पूर्व में रवि किशोर जैसवाल की परिषद में पार्षद रही थीं और उस वक्त किये अपने कार्यों और विधायक निधि से वार्ड में हुए कुछ कार्यों को लेकर मतदाताओं के बीच जाएंगी।
भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करके बाजी मार ली है। वार्ड क्रमांक छह में भाजपा ने पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के नगर अध्यक्ष जिम्मी कैथवास को अपना प्रत्याशी बनाया है। जिम्मी ने आज ही अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। कांग्रेस से यहां दुर्गेश बामने का नाम दावेदारों में शामिल है और माना जा रहा है कि दुर्गेश को पार्टी का टिकट मिल भी जाएगा। इससे पहले इस वार्ड से बामने परिवार से ही श्रीमती शारदा बृजेश बामने ने प्रतिनिधित्व किया था।

नाराजी कहीं भारी न पड़ जाये

भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित करके बाजी तो मार ली है, लेकिन जैसा कि पहले से ही उम्मीद थी कि लिस्ट जारी होते ही नाराजी और विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगेंगे, ठीक वैसा ही हुआ है। हालांकि यह नाराजी खुलकर तो नहीं है, अलबत्ता वार्ड क्रमांक 8 से जो तीन नाम प्रमुखता से पार्टी कार्यकर्ताओं के मध्य चल रहे थे, उन तीनों को नजरअंदाज कर दिया गया है। इस वार्ड के कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि सुधा बबील कैथवास, ज्योति राजकुमार बावरिया और लक्ष्मी रूपचंद अहिरवार में से किसी एक को टिकट मिलेगी। लेकिन, पार्टी से टिकट लाने में बाजी शैली आदित्य मैना के हाथ लगी है। इस निर्णय से क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में दबे स्वर में नाराजी तो है, लेकिन वे पार्टी के निर्णय के खिलाफ खुलकर भले न आएं, चुनाव में घर भी बैठ गये तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। बहरहाल, सूची जारी होने के बाद अब आगे समीकरण कैसे बनते और बिगड़ते हैं, रूठों को मनाने में पार्टी कितनी उर्जा लगाती है, रूठे मानते हैं या इस तरफ से कोई नया उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में सामने आता है, यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल, इतना ही।

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