नर्मदापुरम। जरा सोचिए, आसमान से बिजली गिरने वाली हो और आपको 40 मिनट पहले ही पता चल जाए? अब यह मुमकिन है। मानसून में आसमान से बरसने वाली ‘बिजली’ (वज्रपात) के कहर से इंसानों और बेजुबान मवेशियों की जान बचाने के लिए नर्मदापुरम जिला प्रशासन ने मध्य प्रदेश में पहली बार एक अनोखा और बेहद महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया है— ‘प्रोजेक्ट दामिनी’।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के रेवा सभा कक्ष में कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने इस विशेष अभियान का शंखनाद किया। इस दौरान इस लड़ाई का चेहरा बने एक खास मैस्कॉट (शुभंकर) ‘इलेक्ट्रा’ को भी लॉन्च किया गया, जो अब जिले के हर गांव और घर में सुरक्षा का संदेश पहुंचाएगा।
जेब में रखिए ‘दामिनी’, टल जाएगा बड़ा खतरा!
कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने साफ किया कि नर्मदापुरम एक खेती-किसानी वाला जिला है। मानसून में जब किसान खेतों में पसीना बहा रहे होते हैं, तब उन पर आसमानी आफत का सबसे ज्यादा खतरा होता है। इस खतरे का काल है ‘दामिनी ऐप’।
यह ऐप कैसे काम करता है?
- एडवांस अलर्ट : यह भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का ऐप है, जो आपके ठिकाने से 20 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने की सटीक आशंका 30 से 40 मिनट पहले ही बता देता है।
- बस यह करना होगा : नागरिकों से अपील है कि तुरंत मोबाइल में दामिनी ऐप डाउनलोड करें और अपनी लोकेशन व नोटिफिकेशन हमेशा ऑन रखें।
- एक्शन प्लान : 3 चक्रों में सुरक्षित होगा आपका गांव
यह अभियान सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर तीन चरणों में उतरेगा।
- पहला चक्र : अफसरों की ट्रेनिंग, स्कूलों में बच्चों को ‘अवेयरनेस एंबेसडरÓ बनाना और जिला स्तर पर कार्यशालाएं।
- दूसरा चक्र : जनपद स्तर पर स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों को कमान सौंपना।
- तीसरा चक्र : हर गांव में सीधे जनता से संवाद और संकट से निपटने के लिए ‘आपातकालीन प्रतिक्रिया दल’ की तैनाती।
’30-30 का ये नियम’ याद रख लिया, तो बच जाएगी जान!
एक्सपर्ट्स ने कार्यशाला में वज्रपात से बचने का एक अचूक वैज्ञानिक फॉर्मूला बताया ’30-30 का नियम’ अगर बिजली चमकने के 30 सेकंड के भीतर बादलों की गडग़ड़ाहट सुनाई दे, तो तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेड में चले जाएं। और हां, आखिरी गडग़ड़ाहट सुनने के बाद भी कम से कम 30 मिनट तक अंदर ही रहें। भूलकर भी न करें ये गलतियां बिजली चमकते समय कभी भी पेड़ों के नीचे न छिपें (सबसे ज्यादा मौतें यहीं होती हैं)।
खुले खेतों, नदी, तालाब या पानी के स्रोतों से तुरंत दूर भागें।
लोहे या धातु की चीजों से दूरी बनाएं और गरज-चमक के बीच समूह में खड़े न हों।
यूनिसेफ भी हुआ मुरीद : एमपी का रोल मॉडल बनेगा नर्मदापुरम
इस अनूठी पहल को देखकर मध्य प्रदेश यूनिसेफ के प्रमुख विलियम एनलैंड भी खुद को तारीफ करने से नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा कि वज्रपात से जनहानि और पशुहानि रोकने के लिए नर्मदापुरम ने जो रास्ता दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत (रोल मॉडल) बनेगा।
इस हाई-प्रोफाइल कार्यशाला में यूनिसेफ के अनिल गुलाटी, आपदा प्रबंधन संस्थान के एक्सपर्ट अभिषेक मिश्रा सहित नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू महेंद्र यादव, एसपी साईं कृष्ण एस. थोटा, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन और अपर कलेक्टर अनिल जैन सहित भारी संख्या में जागरूक नागरिक और मीडियाकर्मी मौजूद रहे।











