इटारसी। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जमानी (शिवकृपा वेयर हाउस) में गेहूं बेचने आए किसानों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। गेहूं की तुलाई हुए हफ्ता भर बीत जाने के बाद भी समिति द्वारा बिल जनरेट नहीं किए गए हैं। बिल न बनने के कारण पोर्टल पर भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
हफ्तों से भुगतान का इंतजार
परेशान किसानों ने बताया कि उनकी उपज की तुलाई अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ही पूरी हो चुकी है, लेकिन समिति स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। प्रभावित किसानों की सूची लंबी है जिसमें अर्चना साहू ग्राम धाई, 22 अप्रैल को 52 क्विंटल गेहूं की तुलाई हुई, कार्तिक मेहतो ग्राम अमाढ़ा, 24 अप्रैल को 52 क्विंटल की पर्ची कटी, बालाराम उइके 24 अप्रैल को 52 बोरी की तुलाई, सरवन जवारी ग्राम पीपलढाना 25 अप्रैल को 75 क्विंटल गेहूं तुला, हेमराज नरवरे 27 अप्रैल को 39 बोरी की तुलाई हुई।
इलाज के लिए भटक रहे किसान
भुगतान में हो रही देरी का सबसे दर्दनाक पहलू मानवीय संकट है। किसान मनोज मेहता ने बताया कि उनके पिता भोपाल के सागर अस्पताल में गंभीर स्थिति में भर्ती हैं। अस्पताल के खर्च के लिए उन्हें तत्काल रुपयों की आवश्यकता है, लेकिन अपनी ही फसल बेचने के बाद भी वे खाली हाथ हैं।
अधिकारियों के चक्कर काट रहे अन्नदाता
समस्या के निराकरण के लिए सोमवार को बड़ी संख्या में किसान एसडीएम कार्यालय पहुंचे। एसडीएम की अनुपलब्धता के कारण किसानों ने खाद्य अधिकारी से गुहार लगाई। किसानों का आरोप है कि शुरुआत में खाद्य अधिकारी ने इस मामले में असमर्थता जताई, बाद में आश्वासन दिया कि शाम तक केंद्र पहुंचकर बिल बनवा दिए जाएंगे लेकिन शाम को संपर्क करने पर अधिकारियों ने फिर से टालमटोल वाला रवैया अपनाया।
किसानों की मांग है कि हमारी उपज तुल चुकी है, फिर बिल क्यों नहीं बनाए जा रहे? हमें नकद नहीं, बस हमारा वाजिब भुगतान समय पर चाहिए ताकि हम अपनी जरूरतों और इलाज का खर्च उठा सकें। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिल बनाकर भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।











