हनुमान जी की आराधना से कठिन ग्रह भी शांत हो जाते हैं

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इटारसी। भारतीय पंचांग में नौ ग्रह उल्लेखित हैं जिनमें शनि एवं राहु केतु को सबसे कठिन ग्रह माना जाता है, जो मानव जीवन में प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करते हैं। इन कठिन ग्रहों को शांत करने हम सब को हनुमान जी (Hanuman ji) की आराधना सत्य निष्ठा से करनी चाहिए।
उक्त उद्गार संत श्री महावीर दास (Saint Shri Mahavir Das) ने ग्राम सोनतलाई (Village Sontalai) में व्यक्त किए। चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) के महापर्व पर ग्राम सोनतलाई में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ (Shri Shatchandi Mahayagya) एवं श्री राम कथा प्रवचन समारोह (Shri Ram Katha discourse ceremony) में आज संत श्री महावीर दास जी ने श्री हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मोरे प्रभु अस, विश्वासा, राम ते अधिक राम कर दा सा, अर्थात जो काम भगवान राम नहीं कर सकते वो उनके दास हनुमान कर सकते हैं। इसलिए संसार में भगवान श्री राम को प्रभु कहा जाता है, तो हनुमान जी को महाप्रभु माना जाता है, क्योंकि हनुमान जी की कृपा से जीवन में कठिन ग्रहों के साथ ही अन्य कठिन कार्य भी आसान हो जाते हैं। इसी प्रसंग को विस्तार देते हुए आचार्य राघवेंद्र रामायणी ने कहा कि बेगी हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होय हमारो, अर्थात महाप्रभु श्री हनुमान जी हम जनमानस के ही नहीं बल्कि भगवान के संकट को भी दूर कर देते हैं जिसका सीधा उदाहरण श्री लक्ष्मण जी के जीवन का है, जब राम रावण युद्ध में मेघनाद की ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण जी मूर्छित हुए तो हनुमान जी ने ही संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाए।
आचार्य चेतन कृष्ण मानस सुमन एवं स्वर कोकिला शिरोमणि दुबे ने भी श्री हनुमान जी महाराज की महिमा का वर्णन करते हुए मधुर भजनों की भी प्रस्तुति दी। संयोजक पं. राजीव दीवान ने बताया कि सोनतलाई में आयोजित यह अनुष्ठान श्री राम नवमी पर पूर्ण आहुति महाआरती एवं भंडारे के साथ संपन्न होगा। इस अवसर पर यहां पधारे समस्त साधु-संतों और महात्माओं को सम्मानित किया जाएगा।



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