इटारसी। नर्मदापुरम जिले में किसानों के लिए खाद का संकट गहराता जा रहा है। विशेष रूप से डीएपी की कमी से किसान बेहद परेशान हैं, क्योंकि उन्हें अपनी गेहूं की बोवनी के लिए तुरंत खाद की जरूरत है। सरकारी वितरण केंद्रों पर स्थिति यह है कि टोकन मिलने के बाद भी खाद कब मिलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
आज कृषि उपज मंडी में किसानों से बात करने पर उनकी पीड़ा खुलकर सामने आई। किसान तुलसीराम ने बताया कि बड़ी मुश्किल से टोकन तो मिल गया, लेकिन खाद मिलने में कब तक का समय लगेगा, इसका कोई अंदाजा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘सुबह 7 बजे लाइन में लगे, तब जाकर शाम 5 बजे टोकन मिला।’ यह स्थिति दर्शाती है कि किसान किस कदर मजबूर हैं और घंटों लाइन में खड़े होने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं।
लाखों रुपए का खेल और सरकारी लापरवाही
इस समय लगभग 4000 टोकन लंबित हैं। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, हफ्ते में एक बार ही खाद की रैक आती है, जिससे मुश्किल से 100-150 किसानों को ही खाद मिल पाती है। इस गति से बचे हुए किसानों को खाद मिलने में दो महीने से भी ज्यादा का समय लग सकता है, जब तक कि उनकी बोवनी का समय निकल चुका होगा। इस मजबूरी का फायदा उठाकर बाजार में खाद-बीज की दुकानें तीन गुनी कीमत पर डीएपी और यूरिया बेच रही हैं। किसान को मजबूरी में खुले बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है।
किसान नेता अरुण कुमार ने इस मामले में एसडीएम नीलेश कुमार शर्मा से मुलाकात कर सुझाव दिए। उन्होंने टोकन व्यवस्था बंद करके सीधे सोसायटी के माध्यम से खाद वितरण करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि खुले बाजार में मिलने वाली खाद के साथ जिंक या सल्फर लेने की बाध्यता खत्म होनी चाहिए।
अफसरों की चुप्पी और किसानों की बेबसी
जिला अधिकारी (डीएमओ) का कहना है कि खाद की रैक देरी से आ रही है, जिसके कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। हालांकि, अधिकारी स्तर पर इस गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हुए नहीं देखा गया है। लगभग 4 हजार टोकन अभी भी लंबित हैं, और इस अनिश्चितता के चलते किसानों की फसल बर्बाद होना तय है। इस पूरे मामले में किसानों की बेबसी और सरकारी उदासीनता साफ नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि जब तक कोई अधिकारी फील्ड पर आकर इस समस्या का समाधान नहीं करता, तब तक उनका भगवान ही मालिक है।








