गांधीवादी समीरमल गोठी नहीं रहे, शोक की लहर

गांधीवादी समीरमल गोठी नहीं रहे, शोक की लहर

इटारसी। गांधी पुण्यतिथि के सिर्फ एक दिन बाद ही शहर सहित जिले के लिए एक बड़ी दुखद खबर आयी। खबर यह है कि गांधीवादी समीरमल गोठी (Sameramal Gothi)हमारे बीच नहीं रहे। उनका बीती रात दुखद निधन हो गया, वे 94 वर्ष के थे। उनका जन्म 14 अक्टूबर 1927 को पिता फूलचंद गोठी (Phoolchand Gothi)के यहां हुआ था। मूलत: गोठी परिवार राजस्थान का है। लेकिन वे बैतूल के रास्ते इटारसी आये थे। स्व,गोठी 1946 से व्यापार के सिलसिले में बैतूल (Betul)से इटारसी (Itarsi) आते जाते थे। लेकिन वे 1952 से स्थायी तौर पर इटारसी में रहने लगे थे। उनके निधन से नर्मदांचल (Narmadanchal)में शोक की लहर है। अंतिम यात्रा आज रविवार को दोपहर बाद 3 बजे निकाली जाएगी।
जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष प्रमोद पगारे (Pramod Pagare) ने बताया कि गांधीवादी समीरमल गोठी ने अपने निज निवास पांचवी लाइन में जीवन की अंतिम सांस ली। पिछले कुछ दिनों से वे अत्यधिक बीमार चल रहे थे। उन्हें पहले नर्मदा अपना अस्पताल होशंगाबाद (Narmada Apna Hospital Hoshangabad) में भर्ती कराया गया। जहां से 3 दिन पूर्व उन्हें मेदांता हॉस्पिटल इंदौर (Medanta Hospital Indore)ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर श्री समीरमल गोठी को उनके गृह नगर इटारसी लाया गया। जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। समीर मल गोठी कट्टर राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने जीवन भर खादी पहनना और ओढऩा नहीं छोड़ा। इटारसी की सेठ लख्मीचंद गोठी धर्मशाला (Seth Lakhmichand Gothi Dharamshala)में 1939 में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)का पदार्पण हुआ था। अभी 2 साल पहले ही उन्होंने महात्मा गांधी की यात्रा के स्मरण हेतु एक कक्ष सेठ लख्मीचंद गोठी धर्मशाला के प्रथम तल पर बनवाया था। उनकी एक इच्छा अधूरी रह गई। वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय चिकित्सालय (Dr. Shyama Prasad Mukherjee Government Hospital)में एक धर्मशाला बनवाना चाहते थे लेकिन वह कार्य उनके जीते जी पूरा नहीं हो सका। किंतु उम्मीद है भविष्य में वह कार्य पूरा होगा स्वर्गीय श्री गोठी की छवि एक निर्विवाद राजनेता, एक सक्षम और सफल व्यापारी, सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालो में थी।

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