इटारसी। विप्र धेनु सुर संत हित लिन्ह मनुज अवतार। यानी ब्राह्मण, गौ, देवता और संतों के लिए भगवान ने मनुष्य का अवतार लिया। वे (अज्ञानमयी, मलिना) माया और उसके गुण (सत, रज, तम) और (बाहरी तथा भीतरी) इंद्रियों से परे हैं। उनका (दिव्य) शरीर अपनी इच्छा से ही बना है (किसी कर्म बंधन से परवश होकर त्रिगुणात्मक भौतिक पदार्थों के द्वारा नहीं)॥
तवा नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतर्गत चौथे दिवस की कथा में बिलासपुर से पहुंचे कथा व्यास आचार्य अविनाश तिवारी ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई जिसमें आचार्य ने बताया कि कंस के अत्याचार से जब धरती पीडि़त हुई तब गौ का रूप बनकर ब्रह्मा जी के पास गई जिसमें ब्रह्मा जी को भगवान ने आदेश किया कि मैं धरती का भार हरण करने देवकी और वासुदेव का आठवां पुत्र बनकर आऊंगा। इस तरह से श्रीकृष्ण ने मानव कल्याण के लिए अवतार लिया। इस कथा में यजमान परिवार सहित बड़ी संख्या में आस पास और गांव के महिलाएं और पुरुष कथा का लाभ लेकर जीवन को कृतार्थ कर रहे हैं।




























