नर्मदापुरम। घरेलू बिजली बिल से राहत पाने के लिए सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को अब भारी वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ रहा है। मामला नर्मदापुरम के मालाखेड़ी (वार्ड 10) निवासी मनीष कुमार वर्मा (कनेक्शन नं. N 2775022169) का है, जिन्होंने अपने घर पर 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगवाया है।
उपभोक्ता का दावा है कि ग्रिड को अधिक बिजली एक्सपोर्ट करने के बावजूद म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उन्हें हर महीने 750 से 850 रुपये का बिल भेजा जा रहा है। जुलाई 2026 के बिल के अनुसार, उपभोक्ता ने चालू अवधि में लगभग 314.25 यूनिट बिजली एक्सपोर्ट की और 323.04 यूनिट इम्पोर्ट की। दोनों के बीच नेट अंतर मात्र 8.79 यूनिट का है, इसके बावजूद भारी फिक्स्ड चार्ज, मीटरिंग चार्ज और अन्य अधिभारों के कारण कुल देय राशि 750 रुपये से अधिक बनी हुई है। उपभोक्ता ने बताया कि सोलर की 2000 रुपये मासिक किस्त और बिजली बिल मिलाकर अब उनका कुल खर्च 2700 से 2800 रुपये तक पहुँच गया है, जबकि सोलर लगाने से पहले उनका सामान्य बिल 1500 से 2000 रुपये ही आता था।
यह मामला नेट-मीटरिंग, ऊर्जा समायोजन और बिजली कंपनियों की बिलिंग पद्धति की पारदर्शिता पर गंभीर जनहित के सवाल खड़े करता है। इस संबंध में मांग की गई है कि विद्युत वितरण कंपनी सोलर उपभोक्ताओं की बिलिंग प्रणाली को सार्वजनिक करे, बिलों की स्वतंत्र तकनीकी व वित्तीय जांच कराई जाए और उपभोक्ताओं को वास्तविक आर्थिक राहत देने के लिए राज्य स्तरीय समीक्षा समिति का गठन किया जाए। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के नाम पर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है, इसलिए सरकार और विद्युत नियामक आयोग को इसमें तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।











