Dussehra: रावण के पुतले का कद घटाया, चंद लोग करेंगे दहन

Dussehra: रावण के पुतले का कद घटाया, चंद लोग करेंगे दहन

भक्तों की नामौजूदगी से दुर्गा उत्सव (Durga Utsav) में पंडाल सूने

इटारसी। सोमवार, 26 अक्टूबर को दशहरा पर्व (Dussehra festival) मनाया जाएगा। इस बार का दशहरा बीते वर्षों के दशहरा पर्व से बहुत जुदा होगा। कोरोनाकाल में हर त्योहार पर असर पड़ा है तो दशहरा पर्व भी स्थिति बदली नहीं है। दुर्गा उत्सव (Durga Utsav) में पंडाल भक्तों की अत्यंत कम मौजूदगी के कारण सूने-सूने से रहे। न कोई सार्वजनिक आयोजन और ना ही दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हर रस्म केवल इसलिए निभाई जा रही है, क्योंकि परंपरा को निभाना जरूरी है। गांधी मैदान में शाम 7 बजे और सूखा सरोवर में रात 8 बजे रावण के पुतले का दहन होगा।

इस बार बिना रामलीला मंचन (Raamleela Manchan) के रावण दहन (Ravan Dahan) का कार्यक्रम भी होगा। हालांकि इससे पूर्व भी ऐसा इस शहर में हो चुका है। लेकिन, वर्षों बाद फिर ऐसा हो रहा है कि बिना रामलीला मंचन के रावण के पुतले का दहन होगा। इसके लिए नगर पालिका दो स्थानों पर दशहरा उत्सव समिति के माध्यम से आयोजन करेगी। कोरोना को देखते हुए शासकी की गाइड लाइन और कोरोना से बचाव के लिये आयोजनकर्ताओं ने कई बदलाव किये हैं, ताकि लोगों संक्रमण से बचाया जा सके।

केवल रावण का पुतला जलेगा
शहर में पूर्व वर्षों के अनुसार ही दो स्थानों पर रावण के पुतलों का दहन होगा। पहला रावण दहन गांधी स्टेडियम (Gandhi Stadium Itarsi) में और दूसरा सूखा सरोवर मैदान (Sukha sarovar Maidaan Itarsi) पुरानी इटारसी में होगा। इस वर्ष एक और कमी रहेगी कि केवल रावण का पुतला जलेगा, कुंभकर्ण के पुतले नहीं जलाए जाएंगे। कुल जमा इस बार के दशहरे पर रावण दहन कार्यक्रम की महज रस्म अदायगी ही होगी।

ऊंचाई भी आधे से कम
इस वर्ष रावण के दो पुतले पहले की तरह ही जलेंगे। लेकिन, कुंभकर्ण का पुतला नहीं जलेगा और रावण का यह पुतला पिछले वर्ष के पुतलों के कद से काफी छोटे यानी आधे से भी कम कद के रहेंगे। बीते वर्षों में रावण और कुंभकर्ण के पुतले 35 फुट और उससे अधिक भी होते थे। लेकिन, इस वर्ष महज 12 फुट के रावण के पुतले दोनों स्थानों पर जलाये जाएंगे।

सिर्फ समिति के सदस्य रहेंगे
दशहरा महोत्सव (Dussehra Mahotsav 2020) में आमजन को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए आयोजन को काफी छोटा किया गया है। ये केवल सांकेतिक ही रहेंगे। न कोई सांस्कृतिक आयोजन होगा और ना ही मंचीय। रावण दहन के आयोजन के दौरान शहर की जनता को मैदान में प्रवेश करके आयोजन में शामिल होने की अनुमति नहीं रहेगी। केवल समिति के सदस्य पुतला दहन करेंगे।

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