हाईकोर्ट High Court से मिली निजी स्कूलों Private schools को अंतरिम राहत

हाईकोर्ट High Court से मिली निजी स्कूलों Private schools को अंतरिम राहत

हाईकोर्ट ने कहा, फीस माफ नहीं होगी, देनी होगी ट्यूशन फीस

इटारसी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय Madhya Pradesh High Court के मुख्य न्यायाधीश एके मित्तल Chief Justice AK Mittal एवं न्यायमूर्ति विजय शुक्ला Justice Vijay Shukla की युगल पीठ ने प्रदेशभर के प्राइवेट स्कूलों Private schools की एसोसिएशन association को अंतरिम आदेश के द्वारा राहत प्रदान की। उच्च न्यायालय द्वारा सभी निजी स्कूलों Private schools  को अपने यहां अध्ययनरत छात्रों से ट्यूशन फीस tuition fees वसूलने की छूट दे दी गई है एवं कोविड-19 महामारी खत्म होने के पश्चात, उनको बीच के छूटे हुए अंतराल की ट्यूशन फीस के अलावा, सभी मदों की फीस एवं अन्य शुल्क वसूलने की छूट भी दिया है। सोसाइटी ऑफ़ प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर्स Society of Private School Directors (सोपास) व इंदौर सीबीएसई एसोसिएशन CBSE Association की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर Senior Advocate Piyush Mathur एवं अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता Advocate Siddharth Radhelal Gupta ने पैरवी की।

ज्ञातव्य है कि प्रदेशभर के निजी स्कूलों का अपने यहां अध्ययनरत छात्रों एवं उनके अभिभावकों से लंबे अंतराल से कोर्ट में विवाद चल रहा था। लॉकडाउन के दरमियां राज्य शासन ने विभागीय आदेश जारी किए थे, इसके अंतर्गत स्कूलों को मात्र ट्यूशन फी लेने का अधिकार था एवं अन्य मदों की फीस एवं शुल्क लेने की छूट प्राप्त नहीं थी। इसके विरुद्ध सोपास अशासकीय स्कूल एसोसिएशन, मध्य प्रदेश द्वारा उच्च न्यायालय में जून 2020 में याचिका दायर की गई थी, जिस पर उच्च न्यायालय द्वारा आज प्रभावी आदेश जारी किए गए। आदेशित किया कि कोविड-19 महामारी के पश्चात स्कूल जब पुन: सुचारू रूप से संचालित होंगे, तब स्कूल अपने छात्रों एवं अभिभावकों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य सभी मदों के शुल्क एवं फीस वसूलने हेतु स्वतंत्र रहेंगे।

उच्च न्यायालय द्वारा यह भी आदेशित किया कि अशासकीय स्कूल ट्यूशन फीस के साथ अन्य शुल्क वसूलने हेतु अधिकृत नहीं होंगे। स्कूल 24 मार्च 2020 की स्थिति में जो ट्यूशन फीस अपने छात्रों से ले रहे थे, वही लेने हेतु स्वतंत्र रहेंगे। अगर इस तारीख के पश्चात किसी भी तरह का की बढ़ोतरी ट्यूशन फीस में की गई है तो वह लागू नहीं होगी। सभी स्कूल संचालकों को 10 सितंबर 2020 तक शपथ पत्र उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा कि वे ट्यूशन फीस के अलावा कोविड-19 किसी भी अन्य चार्ज अथवा शुल्क अपने छात्रों से नहीं लेंगे। जो भी चार्ज अथवा शुल्क ट्यूशन फी के अलावा होगा वह कोविड-19 महामारी के पश्चात छात्रों से वसूला जा सकता है। एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ आशीष चटर्जी ने माननीय न्यायलय के आदेश का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि सभी पालक जिन्होंने अभी तक शुल्क भुगतान नहीं किया है वे कृपया अपने बच्चे के विद्यालय में शिक्षण शुल्क का भुगतान अविलंब करें जिससे विद्यालयों के आवश्यक खर्चों को करने में संभव हो सके।

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