अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद पं. गौरीशंकर शास्त्री का निधन

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद पं. गौरीशंकर शास्त्री का निधन

होशंगाबाद। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद एवं पूर्व कुलपति महर्षि विद्यापीठ पं. गौरीशंकर शास्त्री का 79 वर्ष की आयु में बुधवार को आकस्मिक निधन हो गया। स्थानीय राजघाट पर उनकी एकलौती पुत्री स्नेहा दुबे, नाती हर्षित, संस्कार, तनु, भतीजे पं. महेश दुबे की उपस्थिति में दामाद संजय दुबे ने मुखाग्नि दी। पं. शास्त्री के निधन पर सभी वर्गों के लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। मालूम हो कि पं. शास्त्री का जन्म नर्मदा तट स्थित संडिया के समीप ग्राम सर्रा में 3 अगस्त 1942 को हुआ था। प्राथमिक शिक्षा के बाद उन्होंने वाराणसी विवि से एमए हिन्दी से साहित्याचार्य की उपाधि ली। और वर्ष 1980-81 में महाविद्यापीठ सलकनपुर सन्यास आश्रम विनेपार्ले वेस्ट मुंबई में संस्कृत विषय पर प्राख्यापक के रूप में सेवाएं दी। वर्ष 1985 से 1995 तक महर्षि महेश योगी विद्यापीठ के कुलपति पद पर सेवाएं दी। वर्ष 1996 से वर्तमान तक ज्योर्षि समाचान केन्द्र के संचालक रहे। पं. गौरीशंकर शास्त्री द्वारा कई ग्रंथों का लेखन किया गया। जिसमें स्नेहा ज्योतिष, ज्योतिष कलश, दुर्गा सप्तसती हिन्दी पद्यानुवाद, श्रीमद्भागवत गीता हिन्दु पद्यानुवाद, श्रीमद्भागवत दशम स्कन्ध, ज्योतिष शिक्षा एक अध्ययन आदि में लेखन पर प्रकाशित किये गये हैं। पं. शास्त्री ने कई संस्थाओं की स्थापना की, जिसमें वर्ष 1977 में वेत्रवत संस्कृत विद्यालय रायसेन, वर्ष 1988 में महर्षि महेश योगी विद्यापीठ जर्रापुर होशंगाबाद। पं. शास्त्री वर्तमान में ज्योति विद्यापीठ भोपाल, भागवती संस्कृत विद्यालय भोपाल, ज्योतिष समाधान केन्द्र भोपाल के संचालक थे। पं. शास्त्री ने कुलपति पद पर रहकर 1991-92 में हांगकांग, ताईवान, ओकीनावा, न्यूजीलैण्ड, आस्ट्रेलिया, जापान आदि देश की यात्राएं कर ज्योतिष का प्रचार-प्रसार किया।

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