इटारसी। आज एक बहुत बड़ा प्रश्न हमारे सामने है? घर क्यों मिट रहे हैं। परिवार क्यों बिखर रहे हैं। रिश्तों में मिठास क्यों कम होती जा रही है और समाज में आपसी दूरी क्यों बढ़ती जा रही है?
यह सवाल जैन आर्यिका संघ प्रमुख भावनामति माताजी ने प्रवचन में उठाया। स्वतंत्रता दिवस के पूर्व प्रवचन देते हुए उन्होंने समझाया, मनुष्य ने घर में तो रोशनी की है पर मन के भीतर ईर्ष्या, द्वेष, जलन का अंधकार फैल रहा है।
इसलिए कभी मन में किसी इंसान के प्रति जलन का भाव आए तो उसे जलाने का भाव न करके मंदिर में एक दीपक जला देना। दिए से दिया जलाओगे तो प्रकाश होगा।
एक दीपक जला कर प्रभु से कहना, हे प्रभु मेरे मन के ईर्ष्या, द्वेष रूपी अंधकार को नष्ट कीजिए। उन्होंने कहा घर मकान ईंट से नही प्रेम से बनता है। परिवार खून से नहीं, रिश्तों से नहीं, एक-दूसरे के प्रति सदभावना से बनता है। कोई सफल हो तो कहो तुम्हारी सफलता हमारी खुशी है। कोई दुखी है तो उसका हाथ पकड़कर कहो में तुम्हारे साथ हूं। यही तो जैन धर्म की साधना है।
अपने कर्म में ईमानदारी रखें
दूसरी लाइन के महावीर भवन में आजादी पर्व की पूर्व संध्या पर आर्यिका भावनामति ने कहा, एक व्यक्ति ईमानदारी से व्यापार करता है यह भी देशभक्ति है। एक विद्यार्थी ईमानदारी से पढ़ाई करता यह भी देश के प्रति समर्पण है। 15 अगस्त का दिन केवल झंडा फहराने का दिन नहीं है आज उन अनगिनत त्यागों को याद करने का दिन है जिनकी वजह से हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। दूसरी लाइन के महावीर भवन में आर्यिका सदयमति व भक्तिमति के साथ वर्षा योग कर रहीं हैं।











