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इटारसी में आंसुओं के बीच चले ‘हाइड्रा’, जमींदोज हुए आशियाने

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इटारसी। शहर के घाटली रपटा क्षेत्र में आज कानून की सख्ती के आगे मानवीय संवेदनाएं बेबस नजर आईं। खसरा नंबर 459 की भूमि पर कब्जा दिलाने पहुंची प्रशासनिक टीम ने भारी विरोध के बावजूद बुलडोजर और हाइड्रा मशीनों से 8 परिवारों के घरों को मलबे में तब्दील कर दिया। बरसों की मेहनत से तिनका-तिनका जोड़कर बनाए गए आशियानों को उजड़ता देख महिलाएं और बच्चे बिलखते रहे, लेकिन कोर्ट के आदेश का हवाला देकर हर गुहार को अनसुना कर दिया गया।

मलबे के ढेर पर खड़े सुलगते सवाल

हाथों में अपने घर के बर्तन और बिखरा हुआ सामान समेटते पीडि़तों ने प्रशासन की दोहरी नीति पर कड़े सवाल उठाए हैं। पीडि़तों का कहना है कि अगर हमारा निर्माण अवैध था और जमीन हमारी नहीं थी, तो शासन ने हमें जमीन के पट्टे क्यों दिए? प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए सरकारी पैसा क्यों जारी किया गया? आज जब हमने सिर छिपाने की छत बना ली, तो उसे अवैध बताकर हमें सड़क पर क्यों फेंक दिया गया?

खसरा नंबर के खेल में उलझा विवाद

कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी तनाव की स्थिति बनी रही। स्थानीय नागरिकों ने मशीनों के आगे खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि प्रशासन खसरा नंबर 459 की आड़ में खसरा नंबर 460 पर बने वैध मकानों को भी निशाना बना रहा है। हालांकि, मौके पर मौजूद प्रभारी आरआई ने स्पष्ट किया कि वे केवल न्यायालय के आदेश का पालन कर रहे हैं और 1.85 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दिलाने की यह कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य है।

बेबस बचपन और बूढ़ी आंखें

  • विरोध दरकिनार : भारी पुलिस बल और प्रशासनिक सख्ती के आगे प्रदर्शनकारियों की एक न चली।
  • बदहवास परिवार : जिनके घर टूटे, वे मलबे से अपनी यादें और गृहस्थी का सामान निकालते नजर आए। बच्चों की रुलाई ने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल दहला दिया।
  • ट्रैफिक प्रभावित : इस बड़ी कार्रवाई के कारण घाटली रोड का आवागमन घंटों बाधित रहा, जिससे राहगीरों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

कोर्ट में केस हार चुके थे रहवासी

प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई कृष्ण कांत मेहतो की निजी भूमि पर कब्जा दिलाने के लिए की गई है। संबंधित रहवासी इस मामले में सिविल कोर्ट से केस हार चुके हैं, जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर डिक्री (कब्जा) दिलाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
अब सवाल यह है कि कड़कड़ाती धूप और मुश्किल हालातों के बीच ये 8 परिवार अब अपना सिर कहां छिपाएंगे? क्या प्रशासन इनके पुनर्वास के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगा?

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

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