- पंकज पटेरिया

इटारसी, जिसे कभी ईंटों और रस्सियों के लिए जाना जाता था, आज एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन और विकास का केंद्र बन चुका है। इस प्रगति का श्रेय यहां के विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा और प्रदेश व केंद्र की भाजपा सरकार को जाता है, जिनका मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास’ है। लेकिन इस विकास की दौड़ में एक महत्वपूर्ण अध्याय अनछुआ रह गया है। यह अध्याय है एक ऐसी महान विभूति का, जिनका नाम और योगदान इटारसी के इतिहास में दर्ज होने के बावजूद, आज तक कहीं भी सम्मानपूर्वक उल्लेखित नहीं है।
बात हो रही है महान साहित्यकार और ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादक बाबू महावीर प्रसाद द्विवेदी की। उनका जन्म 15 मई 1864 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हुआ था और 21 दिसंबर 1930 को उनका निधन हुआ। मैट्रिक तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 1882 में रेलवे की नौकरी शुरू की। होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम), इटारसी, झांसी और अजमेर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। यह गर्व की बात है कि वे एक समय इटारसी और होशंगाबाद में माल बाबू के पद पर कार्यरत थे। वे अपनी ईमानदारी और अनुशासन के लिए जाने जाते थे।
हिंदी साहित्य में उनका योगदान अमूल्य है। उन्होंने न केवल ‘सरस्वती’ पत्रिका के माध्यम से साहित्य को नई दिशा दी, बल्कि वे एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी और कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उनके प्रयासों से हिंदी भाषा को एक नई पहचान मिली और उसे गरिमापूर्ण स्थान प्राप्त हुआ। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस धरती को उनके चरण स्पर्श का सौभाग्य मिला, वहां आज उनका कोई नामोनिशान नहीं है। इटारसी और नर्मदापुरम के रेलवे स्टेशनों पर उनकी तस्वीर और नाम के साथ एक पट्टिका लगाई जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके महान योगदान से परिचित हो सके। यह न केवल उनके प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि यह भी दर्शाएगा कि हम अपने इतिहास और महान विभूतियों का सम्मान करते हैं।
वर्तमान में हमारे पास डॉ. सीतासरन शर्मा जैसे कर्मठ विधायक, और दो सांसद, दर्शन सिंह चौधरी और श्रीमती माया नारोलिया हैं, जो क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। आशा है कि इन जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से इस महान साहित्यकार के नाम की पट्टिका जल्द ही रेलवे स्टेशनों पर लगेगी, और इस तरह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कड़ी को सम्मान मिलेगा।
पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार, कवि
संपादक, शब्द ध्वज








