इटारसी। डाक विभाग को बर्बादी से बचाने, निजीकरण के विरोध और विभिन्न कर्मचारी समस्याओं को लेकर भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। महासंघ के संभागीय सचिव वर्ग 3, नर्मदापुरम संभाग राजेश कुमार शर्मा के अनुसार आंदोलन की रूपरेखा में कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन करेंगे जो अंतत: अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगा। विदेशी कंपनी मैकेन्जी के इशारे पर निजीकरण लाने के विरोध और टारगेट के नाम पर कर्मचारियों पर दबाव बनाकर उनके अपने पैसे से खाता खुलवाने जैसी विसंगतियों के खिलाफ यह मोर्चा खोला गया है।
आंदोलन की चरणबद्ध रूपरेखा
20 से 27 जुलाई : कर्मचारी कार्यालयों में ब्लैक बैच (काली पट्टी) बांधकर कार्य करेंगे और विरोध दर्ज कराएंगे।
28 जुलाई : लंच के समय मंडलीय कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
05 अगस्त : एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल रखी जाएगी।
18 अगस्त : मांगें पूरी न होने पर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- टारगेट के नाम पर विभागीय एवं जी.डी.एस. कर्मचारियों का शोषण तुरंत बंद किया जाए।
- एक शहर से दूसरे शहर जाने वाली आरटीएन सेवा बंद कर रेल डाक सेवा अनुभागों को पुन: शुरू किया जाए, ताकि भारत सरकार का पैसा निजी हाथों में जाने के बजाय रेलवे विभाग को मिले।
- मेल मोटर सेवा विभाग के सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए एवं सिविल विंग का डाइंग केडर खत्म कर रिक्तियां भरी जाएं।
- डाक विभाग में बढ़ रहे भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए यूनियन प्रतिनिधियों से वार्ता कर कठोर कार्रवाई हो।
- पोस्टल एकाउंट्स का विकेंद्रीकरण और परिमंडल कार्यालय स्तर पर पीएसीओ/पीएआरओ का पीए/पीओ में विलय रोका जाए। मुंबई विदेश डाकघर के प्रावधानों को दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता में भी लागू किया जाए।
- भूतपूर्व सैनिक कोटे से भर्ती हुए कर्मियों की वेतन विसंगति ठीक की जाए।
- 5 प्रतिशत सीलिंग के चलते नियुक्ति से वंचित मृतक आश्रितों को जीडीएस के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए।
- एनडीसी सिस्टम को पूरी तरह खत्म करके पुराना डिलीवरी सिस्टम पुन: लागू हो।
- 17 सितंबर (भगवान विश्वकर्मा जयंती) को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित किया जाए।











