महंगाई की मार, सहमा बाजार, धनतेरस पर रौनक नदारद

महंगाई की मार, सहमा बाजार, धनतेरस पर रौनक नदारद

सराफा और बर्तन बाजार में ही दिखे ग्राहक

इटारसी। धनतेरस (Dhanteras) पर बाजार में जो रोनक होना चाहिए, उसमें पचास फीसद तक कमी रही। कोरोना के साथ अब महंगाई की मार ने बाजार की कमर तोड़कर रखी है। हालांकि धनतेरस पर सराफा (Sarafa)और बर्तन बाजार (Bartan Bajar) में अवश्य ग्राहकी नहीं, शेष आटो मोबाइल, फर्नीचर, कपड़ा बाजार में मायूसी थी और अगले दो दिन की उम्मीद पर ये व्यापारी टिके हुए हैं। बाजार में ग्राहकी कम होने का कारण महंगाई, कोरोना की मार के अलावा ऑनलाइन से खरीदी भी माना जा रहा है। अलबत्ता धनतेरस पर रस्म अदायगी के लिए लोगों ने बर्तन बाजार में जमकर खरीदी की है। तांबे के बर्तन, स्टील और पीतल के बर्तन, भगवान की मूर्ति आदि की अच्छी मांग रही है।

तीन दिनों की खास ग्राहकी वाले दीपावली पर्व (Deepawali Festival)  पर धनतेरस के साथ शुरू होने वाले त्योहार पर व्यापारियों को जहां अच्छी ग्राहकी होने की उम्मीद होती है, वहीं आमजन में भी नए आभूषण, कपड़े और बर्तन के साथ ही कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदने की इच्छा रहती है। लेकिन इस बार महंगाई और कोरोना से टूटे लोगों की आमद कम होने से बाजार की उम्मीदों पर भी पानी फिरता हुआ नजर आया।

फर्नीचर और इलेक्ट्रिक (furniture and electric)

इलेक्ट्रानिक्स सामग्री के विक्रेता हरीश अग्रवाल बताते हैं कि बाजार जो धनतेरस पर होना चाहिए, पचास फीसदी रह गया। हालांकि धनतेरस के एक दिन पूर्व अवश्य कुछ स्थिति संभली थी तो उम्मीदों का आसमान रंगीन दिखाई देने लगा था। धनतेरस के दिन जो धन की बरसा होनी थी, उस पर नाउम्मीदी के बादल छा गये और छिटपुट छीटें ही पड़े। हालांकि अगले दो दिन हैं, इसलिए आस अभी बाकी है।

युवा व्यापारी अर्जुन भोला  बताते हैं कि व्यापार की स्थिति काफी खराब है। एक वर्ष में व्यापारी हर तरफ से टूट चुका है। बाजार में केवल सर्विस क्लास के लोग ही दिख रहे हैं, जबकि इटारसी का बाजार किसानों और कर्मचारियों के भरोसे ही रोशन होता है। किसान अभी बाजार में निकला नहीं है, कुछ व्यापारी वर्ग ही बाजार में नजर आया है। यानी पचास फीसद कारोबार ही है, जबकि विगत दो वर्ष से बैठा व्यापारी इस बार ज्यादा उम्मीद लगाए बैठा है।

धनतेरस से दीपावली के त्योहार की शुरूआत हो चुकी है। बाजारों में विभिन्न प्रकार की दुकानें पूरी तरीके से सज-धजकर तैयार हैं। लेकिन कोरोना के चलते मंदी का दौर जारी है और उस पर महंगाई ने आमजन को इतना तोड़ दिया कि वे बाजार का रुख नहीं कर पा रहे हैं। बिक्री नहीं होने के कारण दुकानदारों के चेहरों पर मायूसी नजर आ रही है। धनतेरस के साथ शुरू होने वाली दिवाली का त्योहार वैसे तो शुरू हो चुका है और अच्छी बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे दुकानदारों ने दुकानों में सामान भी खूब सारा भर लिया है।

हमारी टीम ने बाजार में जाकर हकीकत को जाना तो दुकानदारों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी। टीम ने जब दुकानदारों से मायूसी का कारण पूछा तो दुकानदारों ने साफ शब्दों में कहा कि अच्छी बिक्री की उम्मीद थी। लेकिन इस बार पिछले साल की तुलना में आधी बिक्री रह गई है और दुकान में सामान भरा पड़ा है। सर्राफा व्यापारी बेनीशंकर शर्मा ने बताया कि अभी नाउम्मीदी नहीं है, धनतेरस से तो दीपावली के बाजार की शुरुआत होती है। दो दिन हैं, आगे के दो दिनों में हम त्योहारी बाजार का लक्ष्य पा लेंगे, ऐसी उम्मीद कर सकते हैं।

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