भीषण ठंड : दो दिन से सरकारी धान की खरीद बंद, किसानों को आग का सहारा 

इटारसी। ठंड से लोग हलाकान हैं। पारा लगातार नीचे जाकर लोगों को कंपकंपा रहा है और ऐसे में लोग रात के वक्त अपने घरों से निकलने में परहेज कर रहे हैं। इस हाड़ कंपाने वाली ठंड में किसान अपने घर से दूर कृषि मंडी में खुले में रात गुजारने को मजबूर हैं। यह डरा देने वाला दृश्य है, रैसलपुर कृषि उप मंडी का जहां सरकार ने समर्थन मूल्य पर इटारसी तहसील के लिए धान खरीदी केन्द्र बनाया है। पिछले दो दिन से यहां धान की खरीद बंद है और कुछ किसान तीन-तीन दिन से अपनी बारी आने का इंतजार कर भीषण ठंड में भी यहीं रात गुजार रहे हैं।
कृषि उपज उपमंडी रैसलपुर में ऐसे कई किसान हैं जो बीते तीन दिन से अपने घर से धान लेकर निकले हैं और उनकी धान की खरीद नहीं होने से वे खुले आसमान में ही रात गुजार रहे हैं। ठंड में आग ही उनका एकमात्र सहारा है, जिस पर वे अपने पेट की आग शांत करने के लिए खाना भी बना रहे हैं और ठंड से बचने का प्रयास भी कर रहे हैं। दरअसल, मौसम खराब होने से ठंड भी बढ़ी है और खरीद एजेंसी ने भी खरीद का काम मौसम की खराबी के कारण ही बंद किया है।

हम्मालों ने रोक दिया काम
रैसलपुर कृषि उपमंडी में धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी का जिम्मा नेफेड का है जो सेवा सहकारी समिति जमानी के माध्यम से खरीद करा रही है। एजेंट के तौर पर काम कर रही सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक भूपेन्द्र दुबे का कहना है कि न तो किसानों के खाते में पैसा आ रहा है और ना ही हम्मालों और लोडिंग के काम में लगे लोगों के खातों में पैसा आया है। ऐसे में हम्मालों ने ही काम रोक दिया है। नेफेड के मैनेजर अभिषेक सिंह ने दो दिन में भुगतान का आश्वासन दिया है।

अभी शेड भी नहीं है खाली
इधर रैसलपुर उपमंडी में जमानी सोसायटी की तरफ से नियुक्त केन्द्र प्रभारी खुमान सिंह भलावी का कहना है कि दो दिन से मौसम खराब चल रहा है। मंडी परिसर में एकमात्र शेड भी खाली नहीं है, ऐसे में यदि उपज की खरीद कर लें तो उसे रखेंगे कहां? परिवहन एजेंसी लगातार परिवहन कर रही है। उम्मीद है कि दो दिन में शेड खाली हो जाएगा तो फिर हम खरीद कार्य पुन: शुरु कर पाएंगे। उनका कहना है कि 4 दिसंबर से खरीद प्रारंभ हुई थी जो 20 जनवरी तक किया जाना है।

घर से बाहर किसान है परेशान
उपमंडी रैसलपुर में इटारसी तहसील के लिए धान उपार्जन केन्द्र बना है। यहां समर्थन मूल्य पर अपनी उपज लेकर दूर-दूर गांव से किसान आ रहे हैं। समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री करने तहसील के करीब 786 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान अपनी उपज लेकर आ रहे हैं और तीन-तीन दिन से यहां ठंड के बावजूद रात गुजारने को मजबूर हैं। हालांकि समिति का कहना है कि दो दिन से खरीद नहीं हुई। जो लोग तीन दिन रुकने की बात कर रहे हैं, उनका नंबर नहीं आया है।

बयानों में विरोधाभास
सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक भूपेन्द्र दुबे और समिति की ओर से नियुक्त खरीद केन्द्र प्रभारी के बयानों में भी विरोधाभाष नजर आ रहा है। समिति प्रबंधक हम्मालों द्वारा पैसा नहीं मिलने से काम रोका जाना बता रहे हैं तो वहीं खरीद केन्द्र के प्रभारी खुमान सिंह भलावी का कहना है कि मौसम खराब होने और शेड में जगह नहीं होने के कारण खरीद का काम बंद किया गया है। जब मौसम ठीक होगा और शेड भी खाली हो जाएगा जो फिर से धान की खरीद का काम प्रारंभ कर देंगे।

एक नज़र…
– अब तक 381 किसानों के भुगतान पत्रक तैयार, लेकिन पैसा एक नहीं मिला
– अब तक कुल धान की खरीदी हुई 20 हजार 7 सौ 52 क्विंटल, 80 किलो
– अभी तक खरीद का भुगतान बाकी, 3 करोड़, 76 लाख, 66 हजार 332 रुपए

इनका कहना है…!
किसानों को खरीद दिनांक से अब तक एक भी रुपए नहीं मिले हैं। हम्मालों और लोडिंग का एक भी रुपए नहीं दिया जा सका है। जब नेफेड की ओर से समिति के खाते में राशि आएगी तो ही भुगतान होगा। ठेकेदार ने काम रोक दिया है।
भूपेन्द्र दुबे, प्रबंधक जमाना सोसायटी

दो दिन से मौसम काफी खराब है, ऐसे में खरीद का काम बंद किया गया है। इधर टीन शेड भी खाली नहीं है। इन हालात में खरीदी नहीं की जा सकती है। शेड खाली होने और मौसम ठीक होने पर खरीद की जाएगी।
खुमान सिंह भलावी, केन्द्र प्रभारी

हम तीन दिन से एक ट्राली धान लेकर यहां ठंड में पड़े हैं। यहीं खुले में आग जलाकर खाना पकाकर खा रहे हैं और यही आग हमारे ठंड मिटाने का सहारा भी बन रही है। यहां खरीदी बंद है और कोई ठोस कारण नहीं बता रहे हैं।
कमलेश बामने, किसान ग्राम सनखेड़ा

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