जीवन में मृत्यु भी आधुनिक हो गई : तिवारी

जीवन में मृत्यु भी आधुनिक हो गई : तिवारी

इटारसी। वर्तमान समय में जहां हमारी जीवन शैली आधुनिक हो गई है, तो वही मृत्यु भी आधुनिक हो गई है। वह भी कब आ जाए और कब आपको ले जाए कोई भरोसा नहीं।उक्त उद्गार पंडित भगवती प्रसाद तिवारी (Pandit Bhagwati Prasad Tiwari) ने ग्राम सोनतलाई में चल रही श्रीमद् भागवत कथा समारोह में व्यक्त किये। श्रीमद् भागवत महापुराण में श्री तिवारी ने धु्रव जी महाराज की भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि राजा परीक्षित को श्रापवश जब मृत्यु के समय का पता चला तब उन्होंने संत सुखदेव (Sant Sukhdev) जी से पूछा कि 1 सप्ताह के समय में की गई भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है क्या? तो संत सुखदेव ने कहा कि भक्ति का कोई समय नहीं होता। बालक ध्रुव ने 5 वर्ष की उम्र में ही अपनी सामर्थ पूर्ण भक्ति से भगवान को प्राप्त कर लिया था।
बीते कोरोना (Corona) काल की महामारी का उल्लेख करते हुए संत भक्त श्री तिवारी ने कहा कि वर्तमान दौर में मृत्यु का भी कोई समय निश्चित नहीं है, किसी भी बहाने वह अचानक आ सकती है और आपकी आत्मा को शरीर से अलग कर सकती है। अत: जब समय मिले तब ही भगवान की भक्ति किसी अच्छे महात्मा के सत्संग में पहुंच कर कर लेना चाहिए, क्योंकि आत्मा का दर्द महात्मा ही समझते हैं, जो जीते जी आपको आत्म सुख प्रदान कर मृत्यु के उपरांत आपकी आत्मा को परमात्मा में विलीन करने के लिए सत्संग रूपी सेतु तैयार करते हैं। कथा के प्रारंभ में मुख्य यजवान अशोक कुमार यादव (Ashok Kumar Yadav), अतिथि राजीव दीवान (Rajiv Dewan) के साथ ही ओपी यादव (OP Yadav), गणराज यादव (Ganraj Yadav), कमल मामा (Kamal Mama), प्रकाश श्रोती (Prakash Shroti), पवन (Pawan), जयदीप (Jaideep), हृदेश (Hridesh), दुर्गेश (Durgesh), दिलीप (Dileep) एवं बृजेश यादव (Brijesh Yadav) आदि ने प्रवचन कर्ता श्री तिवारी का स्वागत किया।

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AUTHORRohit

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