सिंधी अध्यापन शिविर में मातृभाषा की ओर जाने पर जोर

सिंधी अध्यापन शिविर में मातृभाषा की ओर जाने पर जोर

इटारसी। सिंधी संस्कृति अत्यंत समृद्ध है और इसे समझने श्रेष्ठ व प्रामाणिक साहित्य मातृभाषा में ही उपलब्ध है। हमें अपनी संस्कृति को जानना व समझना है तो मातृभाषा से प्यार करना ही होगा।
यह बात मप्र सिंधी साहित्य अकादमी के निदेशक राजेश वाधवानी ने सिंधी अकादमी द्वारा इटारसी की पूज्य पंचायत सिंधी समाज व भारतीय सिंधु सभा के सहयोग से आयोजित 11 दिनी सिंधी भाषा अध्यापन शिविर के समापन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि विज्ञान भी प्रमाणित कर चुका है कि अपनी भाषा में जटिल से जटिल विषय आसानी से समझा जा सकता है किन्तु आधुनिकता की अंधी दौड़ ने बच्चों को अंग्रेजियत की ओर धकेल दिया है, इसलिए सिंधी अकादमी ऐसे शिविरों के माध्यम से बच्चों में सिंधी भाषा के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास कर रही है।
पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष धर्मदास मिहानी ने बताया कि सिंधी धर्मशाला में यह शिविर 23 मई से आरंभ हुआ था। शिविर में इंदौर के युवा साहित्यकार नमोश तलरेजा ने 11 दिन तक सिंधी भाषा का अध्यापन कार्य करते हुए समाज के समृद्ध इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारियां दी। समापन कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीझूलेलाल की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण से हुआ। शिविर में समाजजन को सिंधी देवनागरी लिपि लिखने व बोलने का अभ्यास कराने के साथ ही सिंधी बैतु कविता व गीत, सिंधी संतों, महापुरुषों की जीवन गाथाएं सिंधी परम्पराओं व त्योहार की जानकारी दी। बच्चों को सिंधी साहित्य अकादमी की ओर से प्रशंसा पत्र व पूज्य पंचायत अध्यक्ष धर्मदास मिहानी की ओर से पुरस्कार प्रदान किए।
समापन पर संतोष गुरयानी, बाबू बिजलानी, गौरव फुलवानी, मनीष वसानी, सिमरन चेलानी, रेखा नवलानी, भूमि खुरानी, बबीता चेलानी एवं पूज्य पंचायत सिंधी समाज व भारतीय सिंधु सभा के सभी पदाधिकारी, मातृशक्ति और बच्चे उपस्थित हुए। संचालन भारतीय सिंधु सभा अध्यक्ष गोपाल सिद्धवानी ने एवं आभार महिला शाखा अध्यक्ष पूनम चेलानी ने व्यक्त किया।

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AUTHORRohit

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