घनश्याम दास चावला नहीं रहे

घनश्याम दास चावला नहीं रहे

इटारसी। आरएमएस गुमटी (RMS Gumti,) में पुरानी पुस्तकों का व्यापार करने वाले एवं पूरे हिंदुस्तान (Hindustan) में सिंधु समाज की सेवादारी में जाने वाले घनश्याम दास चावला का बीती रात दुखद निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे तथा घर पर ही रहते थे।
श्री चावला ने जीवन भर कभी किसी से उधार नहीं लिया और न ही किसी से किसी प्रकार का दान लिया। प्रात: काल पानी एवं घर से भोजन लाकर अपना जीवन व्यतीत करते थे। पुरानी किताबें लोगों से खरीदते थे और आधे दाम में बेचते थे। जो कमाई होती थी उसी से निर्वाह करते थे। भारत विभाजन (Partition of India) के बाद श्री चावला इटारसी आए थे। उन्होंने सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं लिया। सरकार ने उन्हें न तो मकान दिया और ना ही दुकान दी। उनके दो पुत्र श्रीचंद एवम सुनील हैं। जो अलग से व्यापार करते हैं।

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AUTHORRohit

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