दुर्गा महानवमी पर आज हुए हवन, पूजन और भंडारे

दुर्गा महानवमी पर आज हुए हवन, पूजन और भंडारे

इटारसी। देवी उपासना के पर्व नवरात्र में आठ दिन तक देवी पूजन व भक्ति के बाद आज गुरुवार को महानवमी (Mahanavmi) पर हवन, पूजन और भंडारे हुए। सुबह पूजन और हवन के बाद दोपहर को कन्या भोज व भंडारे (Bhandare) आयोजित किए। कन्याओं को भोज व दक्षिणा के बाद श्रद्धालुओं ने व्रत खोला। देवी पंडालों में आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। अनेक जगह आज शाम को भी भंडारे होंगे।
आज दोपहर में देवी पंडालों में हवन किये गये। देवी मंदिरों में भी भंडारे का आयोजन किया जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। मां चामुण्डा दरवार के पुजारी गुरू पं. रामजीवन दुबे ने बताया कि आज आश्विन शुक्ल पक्ष दुर्गा महानवमी गुरूवार को रवि योग में देवी मंदिरों एवं दरबारों के साथ समस्त झाकियों में पूजा-पाठ, हवन-आरती प्रसाद वितरण, कन्या भोज के साथ भंडारे का आयोजन रहेगा और इसी के साथ नवरात्र व्रत का समापन होगा।

महिषासुरमर्दिनी के रूप की आराधना
महा नवमी महाशक्ति के सर्वोच्च रूप मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए समर्पित है। उसे महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है, जो राक्षस महिषासुर (भैंस राक्षस) का संहारक है। देवी के इस अवतार में अत्यधिक शक्ति है। इसे सबसे शक्तिशाली रूप के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि महानवमी की पूजा का बहुत महत्व है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन की जाने वाली पूजा त्योहार के अन्य सभी दिनों में की जाने वाली पूजा के बराबर होती है।

नवमी का धार्मिक महत्व-
हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्र हैं जो अश्विन, चैत्र, आषढ़ और माघ हैं। इनमें से आश्विन नवरात्रि का बहुत महत्व माना जात है और इसे पूरे देश में व्यापक रूप से मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि या दुर्गा पूजा उत्सव के रूप में भी जाना जाता है, ‘शक्तिÓ के नौ अवतरों या रूपों की बहुत् भक्ति के साथ पूजा की जाती है। महा नवमी पर, मां सिद्धिदात्री, जो महा शक्ति के सर्वोच्च रूप हैं, की पूजा की जाती है। वह वह है जो राक्षस राजा महिषासुर का संहारक है। देश में देवी दुर्गा की पूजा होगी।

देवी के इन 9 रूपों की होती है पूजा-
इस पर्व के दौरान देवी दुर्गा या पार्वती के 9 रूपों की पूजा की जाती है। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। इसलिए, 9 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान प्रत्येक दिन दुर्गा के प्रत्येक रूप की पूजा की जाती है।

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