सभा के लिए इटारसी पहुंचे थे बापू, आज भी संजो कर रखी है गांधी से जुड़ी यादें

सभा के लिए इटारसी पहुंचे थे बापू, आज भी संजो कर रखी है गांधी से जुड़ी यादें

बापू जिस धर्मशाला में रूके, वहां दिया जाता था हरिजनों को आश्रय, इसलिए की इसकी प्रशंसा

इटारसी। आज पूरा देश में राष्ट्रपिता पिता महात्मा गांधी (Gandhi jayanti 2021) की 152वीं जयंती मनाई जा रही है। बापू को याद किया जा रहा है। साथ ही बापू की यादों को हर जगह लोगो ने संजो कर रखा है। वहीं मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के इटारसी शहर में भी बापू की कुछ यादों को संजोकर रखा गया है। बात दें कि यात्रा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Father of the Nation Mahatma Gandhi) इटारसी आए थे। इतना ही नहीं वे एक दिन यहां धर्मशाला में भी रूके थे। गांधी जी 30 नवंबर 1933 को ट्रेन से वर्धा से इटारसी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। तब वह स्टेशन के ठीक सामने बनी सेठ लखमीचंद गोठी धर्मशाला (Seth Lakhmichand Gothi Dharamshala) में रुके थे। यहां उन्होंने एक रात गुजारी थी।

यहां की थी प्रशंसा
सबसे खास बात की इस धर्मशाला और इटारसी की उन्होंने बहुत प्रशंसा भी की थी। गांधी जी ने धर्मशाला में रखे रजिस्टर में प्रशंसा करते हुए कुछ लाइनें भी लिखी। कहा जाता है कि इस धर्मशाला में हरिजनों को आश्रय दिया जाता था। तब महात्मा गांधी जी ने इन हरिजनों के लिए कहा था। उन्हें इस बात की बहुत ही खुशी हुई और धर्मशाला की प्रशंसा रजिस्टर में की थी। यहां उन्होंने एक सभा का भी आयोजन किया था। जिसमें काफी लोग शामिल हुए थे। इटारसी में जिस धर्मशाला में वे रुके हुए थे आज भी वहां उनके हाथों से लिखा पत्र धर्मशाला में फ्रेम कर लगाया हुआ है।

फोटो फ्रेम के रूप में संजोई यादें


धर्मशाला में आज भी उनके द्वारा इटारसी रुकने के संस्मरण के बारे में महात्मा गांधी के द्वारा स्वयं लिखित पत्र को फोटो फ्रेम कर धर्मशाला परिसर में लगाया हुआ है। यह स्मृति सहेजकर रखी गई है।

बापू प्रवास स्मृति कक्ष बनाया
गोठी धर्मशाला के उस कक्ष को बापू प्रवास स्मृति कक्ष बनाया गया है जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी रुके थे। यहां गांधी के जन्म से लेकर बाद तक के फोटो सहित अन्य सामग्री लगाई गई है।

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