पौधारोपण के बाद भक्ति भाव से मनाई शिवाजी महाराज की जयंती

पौधारोपण के बाद भक्ति भाव से मनाई शिवाजी महाराज की जयंती

नर्मदापुरम। क्षत्रिय मराठा नवनिर्माण सेना (Kshatriya Maratha Navnirman Sena) के द्वारा छत्रपति शिवाजी (Chhatrapati Shivaji) महाराज की जयंती भक्ति भाव से मनाई। संगठन के लोगों ने सबसे पहले सुबह के समय शहर के गुरुगोविंद सिंह पार्क (Gurugovind Singh Park) में पौधारोपण कर विभिन्न प्रजाति के स्वदेशी पौधे रोपे और उनको पेड़ बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर केंद्रीय जल आयोग कार्यालय (Central Water Commission Office) के समाने स्थित शिवाजी चौक (Shivaji Chowk) पर जयंती का आयोजन किया। वैदिक मंत्रों के द्वारा पूजन अर्चन करने के साथ ही शिवाजी महाराज के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित की गई और शिवाजी महाराज अमर रहे का जयघोष किया गया। इस मौके पर समाजसेवी कमल चव्हाण (Kamal Chavan) ने छत्रपति शिवाजी के जीवनवृत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान देशभक्त और कुशल प्रशासक रहे। उनकी वीरता के किस्से पूरा देश और विश्व जानता है।
जनार्दन आगौन (Janardan Agaon) ने कहा कि वर्ष 1670 में मुगलों की सेना के साथ उन्होंने जमकर संघर्ष किया था। मुगलों को हराकर सिंहगढ़ (Sinhagad) के किले पर अपना परचम लहराया था। इसके बाद 1674 में उन्होंने ही पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। शिवाजी महाराज ने भारत में एक आदर्श प्रस्तुत किया है। समाजसेवी सुशीला बाइसकर (Sushila Baiskar) ने कहा कि छत्रपति शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग (Shivneri Durg) में हुआ था। शिवाजी के पिता शाहजी भोसले (Shahji Bhosale) सेना में सेनापति थे। उनकी माता जीजाबाई (Jijabai) धार्मिक स्वभाव वाली महिला थी। बचपन से ही शिवाजी का पालन-पोषण धार्मिक ग्रंथ सुनते सुनते हुआ था। उनके अंदर बचपन में ही शासक वर्ग की क्रूर नीतियों के खिलाफ लड़ने की ज्वाला जाग गई थी।
सुशीला चव्हाण (Sushila Chavan) ने कहा कि शिवाजी को भारत के एक महान योद्धा और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है। शिवाजी ने गोरिल्ला वॉर (Gorilla War) की एक नई शैली विकसित की थी। शिवाजी ने अपने राज काज में फारसी की जगह मराठी और संस्कृत को अधिक प्राथमिकता दी थी। उन्होंने कई सालों तक मुगल शासक औरंगजेब (Aurangzeb) से लोहा लिया था।
इस मौके पर विजय हरणे (Vijay Harne), संतोष राव चांडवाले (Santosh Rao Chandwale), प्रीति आगोन (Preeti Agon), गंगा काले (Ganga Kale), प्रमोद बाघमारे (Pramod Baghmare), पीयूष आगोन (Piyush Agon), विनोद चव्हाण (Vinod Chavan), रजनी (Rajni), जागृति (Jagriti), खुशी (Khushi), सुजल (Sujal), गीता (Geeta), रोहित (Rohit), देवेश (Devesh), सोनी बाई (Soni Bai), मानसी चव्हाण (Mansi Chavan) आदि अनेक सामाजिक लोग तथा नन्हें मुन्हें बच्चे भी शामिल हुए।

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AUTHORRohit

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