साहित्य विमर्श का प्रथम दिन कहानियों के नाम रहा

साहित्य विमर्श का प्रथम दिन कहानियों के नाम रहा

इटारसी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला नर्मदापुरम (All India Sahitya Parishad District Narmadapuram) के द्वारा आयोजित साहित्य विमर्श समारोह का प्रथम दिवस का कार्यक्रम कहानीकार एवं राष्ट्रपति पुरस्कार (President’s Award) से सम्मानित शिक्षक/कहानीकार छिंदवाड़ा (Chhindwara) निवासी दिनेश भट्ट की कहानियों के नाम रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कन्या महाविद्यालय नर्मदापुरम (Girls College Narmadapuram) से सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ ज्ञानेंद्र नाथ पांडे विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ गीतकार रामकिशोर नाविक, वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रकांत अग्रवाल की मंच पर उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता एमजीएम कॉलेज (MGM College) से सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ विनोद सीरिया की रही। मंचासीन अतिथि गणों ने मां सरस्वती का पूजन कर एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम आरंभ किया।
स्वागत भाषण ब्रजमोहन सोलंकी ने दिया। कन्या महाविद्यालय इटारसी (Girls College Itarsi,) के प्राध्यापक डॉ श्री राम निवारिया ने कहानीकार दिनेश भट्ट के जीवन से परिचय कराया। दिनेश भट्ट ने अपनी दो कहानियों डंक एवं अंतिम बूढ़े का लाफ्टर डे को पढ़कर कार्यक्रम में उपस्थित साहित्य अनुरागी सुधि श्रोताओं को तालियां बजाने पर विवश कर दिया।
मंचासीन अतिथियों की उपस्थिति में अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला शाखा के सदस्यों ने कहानीकार दिनेश भट्ट को पुष्प हार पहनाकर एवं शाल श्रीफल भेंटकर कर सम्मानित किया। कहानियों की समीक्षा क्रमश: प्राचार्य अखिलेश शुक्ला, सेवा निवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी (Retired District Education Officer) ब्रज किशोर पटेल, डॉ ज्ञानेंद्र पांडे, डॉ श्रीराम निवारिया, चंद्रकांत अग्रवाल एवं रामकिशोर नाविक ने करते हुए कहा कि शुक्ल की कहानियां सामाजिक कुरीतियों को उजागर कर उन पर पर आघात करती है, समाज में दम तोड़ती मानवीयता को रेखांकित करती हैं। संचालन कीर्ति वर्मा एवं राजकुमार दुबे ने संयुक्त रूप से किया एवं आभार प्रदर्शन भगवान दास बेधड़क ने माना।
कार्यक्रम में रूपेंद्र सोलंकी, राजेश व्यास, विनोद कुशवाहा, राजेश दुबे, मोहन झलिया, विनोद कुशवाहा, विनय चौरे, सुनील दुबे, माखनलाल नागेश, एनआर अग्रवाल, जयप्रकाश अग्रवाल, संत कुमार पांडे, सुनील दुबे, सुरेंद्र तोमर, सुषमा परमहंस, भारत भूषण गांधी, हेमंत भट्ट आदि अनेकों श्रोताओं की उपस्थिति रही।

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AUTHORRohit

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