watch video : महाशिवरात्रि पर तिलक सिंदूर पहुंचेंगे हजारों शिवभक्त

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प्रशासन मुस्तैद, झंडावंदन कर मेला प्रारंभ
इटारसी। महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के पावन मौके पर तिलक सिंदूर (Tilak Sindoor) में जिले का सबसे बड़ा आदिवासी मेला लगेगा। मेला के व्यवस्थित संचालन के लिए प्रशासन मुस्तैद है और आज से ही तिलक सिंदूर में अधिकारियों ने ढेरा डाल लिया है।
आज शाम को इटारसी एसडीएम मदन सिंह रघुवंशी (SDM Madan Singh Raghuvanshi), इटारसी थाना प्रभारी रामस्नेह चौहान (Itarsi police station in-charge Ramsneh Chauhan), तहसीलदार राजीव कहार (Tehsildar Rajiv Kahar), केसला ब्लाक सीईओ वंदना कैथल (Kesla block CEO Vandana Kaithal), थाना प्रभारी पथरोटा नागेश वर्मा (Station in-charge Pathrota Nagesh Verma) सहित अनुविभाग के सभी थाना प्रभारी, जिले का पुलिस फोर्स पहुंच गया है। अधिकारियों ने मेले की व्यवस्था का जायजा लिया। आज शाम को झंडा वंदन करके मेला का शुभारंभ किया। सुबह भगवान भोलेनाथ का अभिषेक ब्रह्म मुहूर्त में होगा और भक्तों द्वारा गुफा मंदिर में दर्शन करने का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। आज घोड़ाडोंगरी विधायक ब्रह्मा भलावी (Ghoradongri MLA Brahma Bhalavi) भी तिलक सिंदूर पहुंचे थे।

जगह-जगह से आते हैं भक्त

तिलक सिंदूर में इटारसी, केसला, बैतूल, हरदा, सिवनी मालवा, नर्मदापुरम और भोपाल से भी भक्त भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां आदिवासी अपने पारंपरिक संस्कार का निर्वहन करने भी आते हैं। बच्चों के मनोरंजन के साधन, आदिवासी संस्कृति की सामग्री, मिष्ठान, झूलों के अलावा खानपान की दुकानें भी होती हैं। तिलक सिंदूर मार्ग पर जगह-जगह भक्तों के फलहार के लिए भंडारे, पंचर की दुकानें लगती हैं, वहां भी भीड़ होती है।

परिवहन व्यवस्था में सुधार जरूरी

जमानी से तिलक सिंदूर मार्ग काफी संकरा है। यहां जब हजारों की संख्या में लोग दुपहिया और चार पहिया के अलावा ट्रैक्टर-ट्राली से पहुंचते हैं तो कई जगह, कई घंटे जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। प्रशासन को परिवहन व्यवस्था में सुधार के प्रयास करने होंगे। हर वर्ष यहां लंबा जाम लगता है और यह प्रशासन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें सुधार के लिए ट्रैफिक को वन-वे करेंगे तो कुछ सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

मंदिर का ज्ञात इतिहास

वर्षों पूर्व आदिवासियों द्वारा इस मंदिर की स्थापना बतायी जाती है। आदिवासी समुदाय के बीच आस्था के प्रतीक बड़ा देव अब समूचे जिले में तिलक सिंदूर वाले महादेव के नाम से जाने जाते हैं। हर शिवरात्रि पर यहां करीब दो लाख लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। सतपुड़ा पर्वत श्रंखला में तिलक सिंदूर ग्राम जमानी से लगभग 8 किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित है। उत्तरमुखी शिवालय सतपुड़ा की लगभग 250 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर में शिवरात्रि के अवसर पर भोमका (गोंड आदिवासियों का पुजारी) ही पूजा कराता है, कहा जाता है कि गोंड राजाओं द्वारा भोमका को इस शिवालय की पूजन के लिए अधिकृत किया था। यही परंपरा अब भी चल रही है। मंदिर के सामने पहाड़ी पर ही दाहिनी ओर कालभैरव की प्रतिमा विद्यमान है, जो गोंडकालीन संस्कृति की कहानी कहती है। काल भैरव को भी गोंड लोग पुराने समय से श्रद्धा से पूजते रहे हैं।
गुफा मंदिर के बायीं ओर पहाड़ी पर ऊपर पार्वती महल का निर्माण सन् 1971 में प्रारंभ हुआ। इसके निर्माण की शुरुआत इटारसी से आमला रेलखंड के रेलकर्मियों ने की थी। इसका शिलान्यास सन 1971 में जमानी के पूर्व मालगुजार पंडित पुरुषोत्तमलाल दुबे ने किया था। क्षेत्र की जनता के अपार सहयोग से इस भवन का निर्माण कार्य 1972 में पूर्ण हुआ। इस गुफानुमा मंदिर में इसी सन् में मां पार्वती, मां दुर्गा एवं श्री गणेश जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

ऐसे पहुंचे तिलक सिंदूर…

तिलक सिंदूर मंदिर तक पहुंचने के लिए इटारसी से जमानी तक पहुंचना होता है। जमानी से तिलक तक करीब 8 किमी की पक्की सड़क है, जो सीधे मंदिर परिसर तक पहुंचती है। मान्यतानुसार पास की गुफा से एक सुरंग पचमढ़ी के निकट जम्बूद्वीप गुफा तक जाती है। यह सुरंग भस्मासुर के स्पर्श से बचने भगवान शिव द्वारा तैयार किया जाना बताया जाता है।

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AUTHORRohit

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