पमरे मजदूर संघ में घमासान, भटनागर के अगले कदम का इंतजार

पमरे मजदूर संघ में घमासान, भटनागर के अगले कदम का इंतजार

इटारसी/जबलपुर। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ (West Central Railway Mazdoor Sangh) की मुख्यालय वर्किंग कमेटी ने संघ के अध्यक्ष डॉ. आरपी भटनागर और उनके पुत्र कार्यकारी अध्यक्ष अमित भटनागर को संघ विरोधी गतिविधियों के कारण तथा असंवैधानिक तरीके से पद का दुरुपयोग करने के कारण निलंबित किया गया। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस दौरान वह संघ की किसी भी बैठक अथवा गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेंगे। जबलपुर की होटल डिलाइट में हुई इस बैठक में मुख्यालय कार्यकारिणी के 112 में से 80 सदस्यों द्वारा यह प्रस्ताव पारित किया। अब आरपी भटनागर के अगले कदम का इंतजार है, क्योंकि संघ के कुछ लोग मानते हैं कि वे चुप नहीं बैठने वाले हैं और कुछ न कुछ अवश्य करेंगे। यह लड़ाई आरपी भटनागर वर्सेस अशोक शर्मा मानी जा रही है।
वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ में पिछले कुछ समय से खींचतान चली आ रही है और अब यह बड़े विस्फोट के रूप में सामने आयी है। संगठन के एक बड़े गुट ने कार्यकारिणी की बैठक कर सर्वसम्मति से मजदूर संघ के अध्यक्ष डॉ. आरपी भटनागर व उनके पुत्र कार्यकारी अध्यक्ष अमित भटनागर को संघ विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए संगठन से सस्पेंड कर शोकॉज नोटिस जारी किया है। पिता-पुत्र के सभी अधिकार तत्काल प्रभाव से छीन लिये गये हैं। इस घटनाक्रम से संघ में हड़कंप की स्थिति है।

ये लगाये हैं भटनागर पर आरोप
– वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के संविधान तथा रेलवे के नियमों के विरुद्ध जाकर अपने पुत्र अमित भटनागर को पद का दुरुपयोग करते हुए संघ के द्विवार्षिक अधिवेशन में 22 दिसंबर 20 को कार्यकारी अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया।
– स्वयं आरपी भटनागर असंवैधानिक रूप से अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं।
– आरपी भटनागर वेस्ट सेंट्रल रेलवे में बहुत कम समय देते हैं। कोरोना काल के दो वर्ष छोड़ दे तो वर्ष में केवल 15 दिन इस क्षेत्र में रहते हैं जिससे मजदूरों के हितों व कल्याण के कार्य अवरोधित होकर संघ अन्य विरोधी यूनियन की तुलना में कमजोर हो रहा है।
भटनागर को रेल से यात्रा करने के लिए प्रथम एसी का कार्ड पास रेलवे बोर्ड से स्वीकृत होने के बाद भी वे हवाई यात्रा करते हैं जिससे मजदूरों की गाड़ी कमाई का पैसा तथा संगठन का पैसा बर्बाद होता है।
– भटनागर द्वारा असंवैधानिक रूप से मुख्यालय कार्यकारिणी के रिक्त पदों को 27 अगस्त 21 को भरा जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
– भटनागर मीटिंगों में अकारण ही जिम्मेदार पदाधिकारियों को अपमानित करते हैं जिससे संघ का कैडर एवं कार्यकर्ता हतोत्साहित होता है तथा संगठन को भारी नुकसान हो रहा है।
– भटनागर ने अवैधानिक रूप से वगैर मंडल परिषदों के अनुमोदन के अपने प्रिय लोगों को मंडलों पर प्रतिनियुक्तियां दी हैं, जिससे संघ का प्रतिवर्ष लाखों रुपए का राजस्व जा रहा है तथा संगठन की छवि आम रेल कर्मचारी में धूमिल हो रही है।
– भटनागर ने संगठन में वंशवाद को बढ़ावा देते हुए अपने पुत्र को असंवैधानिक रूप से पदस्थापित किया तथा अब प्रपौत्र व अन्य रिश्तेदारों को भी संगठन में अनेकानेक प्रकार से लाभ पहुंचा रहे हैं।
– संघ की शाखाओं में अवैधानिक रूप से हस्तक्षेप कर निर्वाचित कार्यकारिणी को भी अनुमादित नहीं किया जाता है तथा अपने मनमर्जी के लोग स्थापित किये जाते हैं।
– अपने व्यक्तिगत हितों को साधने अकर्मण्य, बाहरी व विरोधी यूनियन के कर्मचारियों को संगठन में पनाह दे रहे हैं जिससे संगठन के कैडर में अत्यंत रोष है।
– भटनागर संघ की बैठकें संविधान अनुसार समय पर करने हेतु अनुमोदन नहीं देते हैं जिससे पिछले वर्ष 2020 में सीईसी तथा 2021 में सीईसी की बैठक आहूत नहीं की जा सकी जो असंवैधानिक है।
– भटनागर द्वारा संगठ के पैसे का दुरुपयोग अपने स्वयं, परिवार के सदस्यों को हवाई यात्राएं कराके, रिसोर्ट में ठहराकर, प्रथम श्रेणी एसी में यात्रा कराके किया जा रहा है, जो अत्यंत आपत्तिजनक और अस्वीकार है।
कार्यकारिणी के इस निर्णय पर आरपी भटनागर भी चुप नहीं बैठने वाले हैं। बताया जा रहा है कि भटनागर ने पश्चिम मध्य रेलवे महाप्रबंधक (West Central Railway General Manager) को एक पत्र देकर संगठन के महामंत्री अशोक शर्मा (General Secretary Ashok Sharma) को निष्कासित करने संबंधी पत्र दिया है। भटनागर अपने खिलाफ हुए इस निर्णय को पलटने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। हालांकि कार्यकारिणी की बैठक में पमरे मजदूर संघ के महामंत्री अशोक शर्मा, सीएम उपाध्याय, एसके वर्मा, सतीश कुमार सहित 112 वर्किंग कमेटी सदस्यों में से 79 उपस्थित रहे। बैठक में जबलपुर, भोपाल व कोटा मंडल से संघ के बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनके सर्वसम्मति निर्णय के खिलाफ भटनागर क्या कर सकेंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल संगठन में छोटे स्टेशनों के स्थानीय स्तर के पदाधिकारी यह इंतजार कर रहे हैं कि आखिर ऊंट किस करवट बैठेगा?

 

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