अहंकारी की दशा क्या होती है, इस प्रसंग से बताया

अहंकारी की दशा क्या होती है, इस प्रसंग से बताया

इटारसी। ग्राम सोनतलाई (Village Sontalai) में श्रीमद् भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) में श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।

इस दौरान झांकी सजायी तथा कथा पंडाल में मुख्य यजमान अशोक कुमार (Ashok Kumar) सहित आयोजकों, संगीतकारों एवं श्रोताओं ने पीतांबर वस्त्र धारण किए। भगवान बालकृष्ण (Balakrishna) की झांकी सजाई गई और माखन मिश्री का प्रसाद वितरित किया।
कथा वक्ता भगवती प्रसाद तिवारी (Bhagwati Prasad Tiwari) ने कहा कि मनुष्य चाहे तो अपने आत्मबल से इस मानव जीवन में ही नर से नारायण का अनुभव प्राप्त कर सकता है, जिसका आभास कराने परमात्मा श्री हरि (Shri Hari) ने द्वापर युग में लीला पुरुषोत्तम (Leela Purushottam) श्री कृष्ण (Shri Krishna) के रूप में मानव अवतार धारण किया। श्रोताओं के समक्ष राजा बलि प्रसंग का ज्ञान पूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य कितना ही धनवान ज्ञानवान व बलवान क्यों न हो उसे अपने जीवन में अहंकार कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि अहंकार बुद्धि को नष्ट कर देता है। हम ईश्वर को भी अपने से छोटा समझने लगते हैं जिसका उदाहरण है, राजा बलि (King Bali) जिनसे बड़ा दानवीर संसार में कोई नहीं था लेकिन उनके अंदर अहंकार समाया हुआ था, इसलिए वह अपने समक्ष खड़े भगवान को भी दान मांगने वाला ब्राह्मण समझ बैठे। बामन रूपी भगवान ने तीन पैर जमीन का दान मांगा और दो पैर से ही जमीन आसमान नाप कर तीसरे पैर से अहंकारी राजा का घमंड दूर कर उसका उद्धार किया। श्रोताओं से कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ जाता है तब तब परमात्मा अवतरित होते हैं।

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AUTHORRohit

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