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हाई कोर्ट, जबलपुर का निजी स्कूलों की फीस नियमन पर बड़ा फैसला

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जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ ने निजी शिक्षण संस्थानों से संबंधित फीस नियमन और प्रबंधन हस्तक्षेप के मामलों में एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने निजी स्कूलों द्वारा दायर की गई सभी संबंधित रिट अपीलों और रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस सामान्य आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ताओं को मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा सम्बंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम, 2017 की धारा 11 के तहत अपील का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के कारण याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।

न्यायालय ने माना कि जब किसी वैधानिक समिति द्वारा अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन या सीमा से अधिक शक्ति का प्रयोग करने का आरोप हो, तो रिट याचिकाएं और रिट अपीलें सुनवाई योग्य हैं।

जिला समिति के निर्देश अधिकार क्षेत्र से बाहर

कोर्ट ने पाया कि जिला समिति ने 09.07.2024 को जो आदेश जारी किया था, उसमें दिए विभिन्न निर्देश उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे, और इसलिए वे टिकने योग्य नहीं हैं। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि अधिनियम, 2017 की धारा 5 के तहत सक्षम प्राधिकारी को फीस निर्धारित करने की शक्ति नहीं दी गई है, बल्कि यह फीस वृद्धि को विनियमित करने के लिए है। जिला समिति ने स्कूल प्रबंधन के क्षेत्र में आने वाले कई मामलों पर निर्देश दिए, जो अधिनियम के दायरे से बाहर थे।

मुख्य निरस्त निर्देश

  • स्कूल बैग का वजन नियंत्रित करने हेतु पुस्तकों और स्टेशनरी वस्तुओं की संख्या में कटौती का निर्देश। फर्जी/डुप्लीकेट ISBN वाली पुस्तकों का प्रचलन अगले शैक्षणिक सत्र से बंद करने का निर्देश।
  • अगले सत्र के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए नई पुस्तकों का चयन 1 अक्टूबर 2024 से पहले सुनिश्चित करने का निर्देश।
  • पुस्तक चयन समिति में शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी को अनिवार्य रूप से शामिल करने का निर्देश।
  • यूनिफॉर्म की संख्या दो तक सीमित करने और अभिभावकों को किसी एक ही प्रतिष्ठान से यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य न करने का निर्देश।
  • अनधिकृत शुल्क की वापसी का निर्देश।

सार्वजनिक सुनवाई पर आपत्ति

खंडपीठ ने समिति द्वारा कार्यवाही संचालित करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि समिति ने एक खुली जगह पर सभी अभिभावकों, छात्रों, स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधियों और प्रिंसिपल को एक साथ बुलाकर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की। न्यायालय ने इसे अधिनियम और नियमों में परिकल्पित सुनवाई के अवसर का अनुपालन नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय प्रशासन द्वारा पूरे मुद्दे को जिस तरह से संभाला गया, उससे स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच तनाव और मतभेद पैदा हुए, जो छात्रों की शिक्षा और करियर के लिए अच्छा नहीं है।

फीस वापसी पर रोक जारी

न्यायालय ने 13.08.2024 को दिए गए अपने अंतरिम आदेश को प्रभावी रखा। इस अंतरिम आदेश में 05.07.2024 और 09.07.2024 के उन आदेशों पर रोक लगाई गई थी, जिनमें स्कूलों को वर्ष 2017-18 से पूरी फीस वापस करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, स्कूलों को 10 प्रतिशत से अधिक एकत्र की गई फीस को वापस करने/समायोजित करने का निर्देश जारी रहा।

न्यायालय का अंतिम निर्देश

न्यायालय ने सभी अपीलों और याचिकाओं को स्वीकार करते हुए प्रतिवादियों (राज्य) को मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा सम्बंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम, 2017 और नियम, 2020 के तहत प्रदान की गई प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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