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नियम तोड़े तो जेल और भारी जुर्माना : बल्क वेस्ट जनरेटरों पर कड़ा शिकंजा, कचरा प्रबंधन में डिजिटल गवर्नेंस लागू

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 इटारसी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026Ó पूरी तरह प्रभावी कर दिया गया है। आयुक्त संकेत भोडवे, संयुक्त संचालक नीलेश दुबे के निर्देशन तथा विषय विशेषज्ञ डॉ. केतन मटकर के तकनीकी विश्लेषण से तैयार यह कार्ययोजना सफाई व्यवस्था में मील का पत्थर है।

भोपाल में आयोजित नगर पालिका अध्यक्षों की वर्कशॉप में प्रशिक्षण के बाद, इटारसी नपा अध्यक्ष पंकज चौरे ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए नगरवासियों से सहयोग की अपील की है, ताकि किसी भी अप्रिय विधिक कार्रवाई से बचा जा सके। नए नियमों के तहत अब केवल मामूली जुर्माना नहीं, बल्कि सीधे आपराधिक मुकदमा और जेल का प्रावधान है।

 नई व्यवस्था के दो सबसे सख्त और मजबूत पहलू

1. बल्क वेस्ट जनरेटरों पर शिकंजा और वित्तीय मॉडल

20,000 वर्ग मीटर से अधिक परिसर, 40,000 लीटर से अधिक दैनिक जल खपत या रोज 100 किग्रा से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान बल्क वेस्ट जनरेटर के दायरे में आएंगे।

  •  स्व-निष्पादन अनिवार्य : इन बड़े संस्थानों को अपने परिसर के भीतर ही गीले कचरे का निष्पादन (कम्पोस्टिंग या बायोमेथेनेशन) करना होगा।
  • EBWGR फ्रेमवर्क व ट्रेडिंग : असमर्थ संस्थानों को केंद्रीयकृत ऑनलाइन पोर्टल से विस्तारित बल्क वेस्ट जनरेटर दायित्व  प्रमाणपत्र खरीदना होगा या निकाय को तय शुल्क देकर छूट लेनी होगी।
  • राजस्व से अवसंरचना विकास : इस प्रदूषक भुगतान सिद्धांत से प्राप्त पूरी राशि का उपयोग केवल नगरीय निकायों द्वारा ठोस अपशिष्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर ही होगा।

 2. डिजिटल गवर्नेंस, सख्त प्रवर्तन और जेल का प्रावधान

लापरवाही और भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए इसमें पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की सख्त धाराओं और आधुनिक तकनीक को जोड़ा गया है।

  •  हाईटेक मॉनिटरिंग : 50,000 से अधिक आबादी वाले शहरों में कचरा वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य होगी। वहीं 5 लाख से अधिक आबादी वाले महानगरों में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (कमांड सेंटर) से सीधी निगरानी की जाएगी।
  • पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति व एस्क्रो खाता : बिना पंजीकरण संचालन, डेटा हेरफेर या गलत तरीके से कचरा निपटान पर भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माना) लगेगी। यह राशि समर्पित एस्क्रो खाते में जमा होगी, जिसका उपयोग सिर्फ इसी कार्य में होगा।
  • आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी : विभाग अब शून्य-सहिष्णुता  की नीति अपना रहा है। नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक दंड के साथ-साथ सीधे आपराधिक मुकदमा और जेल भेजने की सख्त विधिक कार्रवाई शुरू की जा रही है।

नगरीय प्रशासन की इस चौतरफा डिजिटल और कानूनी घेराबंदी ने साफ कर दिया है कि शहरों को स्वच्छ रखना अब स्वैच्छिक सेवा नहीं, बल्कि एक सख्त कानूनी बाध्यता है, जिसमें उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सीधे एक्शन लिया जा रहा है।

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

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