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झरोखा : जय उल्लू जी चतुर सुजान

झरोखा : जय उल्लू जी चतुर सुजान

राजधानी से पंकज पटेरिया :
कमलासना सौंदर्य ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू है, जिसे उलूक भी कहते है। लक्ष्मी जी के वाहन की लोक मान्यता के कारण उनकी महिमा को किसी ने धूमिल नही किया। लेकिन इधर साहित्यकारो, कवियों, लेखको, बुद्धिजिवियो ने इनकी मट्टी पलीत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, यहां तक किसी को बेवकूफ कहने में यह बेवकूफी करने पर उल्लू या उल्लूपना कहा जाने लगा।

और तो और किसी शायर ने तो इसके आगे बढ़कर एक शेर ही जोड़ दिया कि हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्ता क्या होगा। अगर सर्वे करें तो हर घर में दिन में दो-तीन बार उनके नाम का उच्चारण किसी ना किसी के लिए होता है।

जबकि उलूक महाशय की महिमा अपरंपार है। एक जानकारी के अनुसार महाभारत में पक्षी के बजाय इनका उल्लेख व्यक्ति के रूप में मिलता है। यह भी उलूक सुबलपुत्र कंधार नरेश और कौरवों के मामा श्री शकुनी का पुत्र है। कौरवों ने कुरुक्षेत्र युद्ध प्रारंभ होने से पहले इसे दुर्योधन का दूत बना कर पांडवों के पास बतौर संदेशवाहक भेजा था।
तंत्र शास्त्र में इनकी महिमा असीम है।

हालांकि लोग इसे अशुभ और अपशकुनी कहते हैं। कुछ लोग इसे लक्ष्मी जी का वाहन न मानकर सहयात्री कहते है। लक्ष्मी जी का वाहन हाथी ही है, जो राजसी शक्ति, ऐश्वर्य साक्षात प्रतिरूप है। वहां यह भी उल्लेख मिलता है उल्लू जी लक्ष्मी जी के नहीं अलक्ष्मी के वाहन हैं क्योंकि वे दुख, दुर्भाग्य, दारिद्र्य की अधिष्ठात्री है।

उलूक निशाचारी जीव है दिन में ऐसे दिखता नहीं है। राजा रात में ही अपने शिकार की तलाश में घूमता रहता। इसकी आवाज डरावनी कही गई है, देखा जाना भी अच्छा नहीं माना जाता। आदि ज्ञान के विद्वान संपादक जी सिंह चौहान ने गहन शोध के बाद अपने लेख में बाल्मीकि रामायण उल्लेख करते लिखा है कि उल्लू को मूर्ख के स्थान पर अत्यंत चतुर सुजान कहा गया है। यह भी उन्होंने लिखा है कि भगवान श्री राम जब रावण को मारने में सफल नहीं हो पाते, उसी समय उनके पास रावण का भाई विभीषण आता है।

तब सुग्रीव राम जी से कहते हैं कि उन्हें शत्रु की चतुराई से बच कर रहना चाहिए।
असम में सफेद रंग के उल्लू महाराज शुभप्रतीक माने जाते हैं। अनेक देशों में जहां उन्हे अशुभ विनाशकारी कहा जाता है, ग्रीस में इससे बुद्धि की देवी एथेन का सहयोगी कहा गया है। दुनिया के अनेक देशों में इसे बेहद चतुर्थ और विवेकमान कहा।

चीनी वास्तुशास्त्र में फेंगशुई में इससे सौभाग्य सुरक्षा का प्रतीक माना गया है। जापानी तो इसे कठिनाइयों से बचाने वाले रक्षक के रूप में मानते हैं। भारतीय समाज मे उल्लू के बारे बहुत सी भांति भी है, उल्लू जिस मनुष्य घर की छत पर आकर उसका नाम लेकर उसकी आवाज मे पुकारता है तो उसकी मृत्यु हो जाती है। लेकिन यह मात्र भ्रम है।

उल्लू मनुष्य की आवाज बोलता न नाम लेकर पुकारता है। सब अफवाह है और निराधार आवैज्ञानिक है। हां यह जरूर है किस की आवाज डरावनी होती है और तंत्र शास्त्र में एक उलुक सिद्धि का जिक्र भी है।

बहरहाल इस जानकारी को ध्यान रख कर हमे उल्लू महाराज की महिमा को अनुभव करते हुए यह जरूर विचार कर लीजिए इनके नाम मान से किसे नवाजा जाए। बहरहाल यह भी सच है कि सियासत की अपनी अलग पाठ शाला है। इधर विधान मे इन्हे जैसा प्रतिष्ठित किया यह एक अलग मसला है।
नर्मदे हर


पंकज पटेरिया
पत्रकार साहित्यकार
ज्योतिष सलाहकार
भोपाल
9340244352 ,9407505651

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