- पंकज पटेरिया
कभी कस्बाई शक्ल की उदास अपनी बुधनी जो अब भाजपा सरकार राज में खास तौर से लंबे समय से यहां का प्रतिनिधत्व करते रहे पूर्व मुख्यमंत्री, अब कृषि मंत्री शिवराज चौहान की सक्रियता से इसके दिन अब फिर ने लगे हैं। शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, रोजगार आदि के क्षेत्र में इसकी गजब चमकदार पहचान बन रही है। वह दिन दूर नहीं जब बुधनी एक सर्व सुविधा पूर्ण शहर होगा।
बहरहाल इसी बुधनी में जहां केवल पैसेंजर ट्रेन ही रुकती थी। लेकिन कुदरती खूबसूरती से भरी पूरी नदी, पहाड़, जंगल, झरने और वन प्राणियों से पहचानी जाने वाली बुधनी से ट्रेन से गुजरते हुए मशहूर फिल्म डायरेक्ट बीआर चोपड़ा को इस जगह ने अपनी जादुई सुंदरता से एक बार में ही ऐसा मोहा कि उन्होंने अपनी फिल्म नया दौर की शूटिंग यहीं करने का निश्चय कर लिया। और अंत में सन् 1956-57 में प्रसिद्ध फिल्म नया दौर की शूटिंग बुधनी में हुई। करीब 1-2 महीने फिल्म की यूनिट बुधनी जंगल में डेरा डाले रही।
फिल्म में अभिनय सम्राट दिलीप कुमार, बैजन्ती माला, जीवन, बीना राय, जीवन आदि थे। अब जहां शानदार फ्लाईओवर बन गया। उसी गड़रिया नाले के तपते और कच्चे धूल भरे रास्तों पर भोपाल, नर्मदापुरम के 50-60 टांगों वालों ने फिल्म स्क्रिप्ट के अनुसार टांगे दौड़ाए थे। उन्हें में एक थे नर्मदापुरम के टांगे वाले जिन्हें हम शौकत चच्चा कहते थे। वे एक तरह से मेरे बहनोई साहब दादा कुटी वाले टीपी मिश्र के परिवार के फैमिली टांगे वाले थे। रात विरात कभी इमरजेंसी में जरा सी सूचना पर वे भागे आते थे। नया दौर की तांगा दौड़ में शामिल शौकत चच्चा ने भी तांगा दौड़ाया था।
उन्होंने ही इस पत्रकार/लेखक को कई दिलचस्प किस्से शूटिंग के समय के सुनाए थे। जैसे यूनिट के लोग पारिश्रमिक के साथ खाने पीने का हम सब टांगे वालों का बहुत ध्यान रखते थे। यह भी एक शहर से आए एक गुंडे ने यूनिट की किसी युवती पर फब्ती कसी थी, तब समझाने बाद फिर उसने वही हरकत करी थी तो कुछ लोगों ने उनकी धुलाई कर दी थी और उन्होंने उठक बैठक लगा कर माफी मांगी थी। शौकत भाई बहुत शरीफ इंसान थे। दादाजी कुटी में होने वाले भंडारे में भी वे प्रेम भाव से आते थे, और प्रसादी पाते थे। ईश्वर ने पक्का उन्हें जन्नत बख्शी होगी। उनकी याद को सलाम। पंकज पटेरिया , वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार संपादक शब्द ध्वज











