झरोखा : कहीं ना कहीं कोई ना कोई होता है…
Jharokha : Somewhere somewhere there is someone...

झरोखा : कहीं ना कहीं कोई ना कोई होता है…

– पंकज पटेरिया:
मां नर्मदा जी गोद मे बसे होशंगाबाद के सतरस्ते से नर्मदा जी के घाट जाता है एक मार्ग पर नगर के एक बहुत प्रतिष्ठित मिष्ठान विक्रेता का एक मकान होता था। अन्य किरायेदारों के अलावा मकान में ऊपर कमरे में एक युवक तकरीब २५ साल का रहता था। रात में उस कमरे में वह कभी रुका भी नहीं था अपने काम से कहीं आता जाता रहता था। उसे रहते हुए कुछ दिन अच्छे गुजरे, लेकिन बाद में कुछ स्थिति ऐसी बनी कि उसे रात भी अपने कमरे में गुजारना पड़ा और तभी से यह सिलसिला शुरू हो गया।
रात होते ही जब वह सो जाता तो अपने आप आधी रात खटिया से कोई उसे उठा कर नीचे सड़क पर फेंक देता। उसे लगा शायद वह खुद ही नीचे उतर आया हो। वह फिर जाकर बिस्तर पर सो जाता, जैसे इसकी नींद लगती, फिर वही घटना रिपीट हो जाती। इस तरह १५ दिन से ऊपर हो गये बात शहर में फैलने लगी।
मेरे एक प्रेस फोटो ग्राफर्स प्रवीण निगम, एक वकील तथा नगर के प्रतिष्ठित व्यक्ति श्याम सैनी को पता लगी। हमने उसी वक्त साथ जाकर मकान का मुआयना किया। जैसे ताला खोला, गायत्री मंत्र करते हुए दरवाजा धकाया, लगा खाट पर से कोई उठ कर बाहर खुले हिस्से गैलरी में जा रहा था।दिखा नहीं पर हम सब को यह अहसास हुआ। हमने यह बात मकान मालिक को बताई वे बहुत अच्छे नेक दिल व्यक्ति थे। चिंतित उस युवक से कहा भैया ऐसा हो रहा हैं तो मकान छोड दे। किराए भी हमे नही चाहिए। इधर मैंने समूचे घटना की जैसे की तैसी रिपोर्ट बना अपने समाचार पत्र मे भेज दी। दूसरे दिन अखबार में यह समाचार के छपते दूर दूर से लोगो के उस मकान को बाधा मुक्त करने के फोन आने लगे। परेशान होकर मकान मालिक ने एक सूरदास दिल्ली निवासी संत से संपर्क किया। इस तरह की परेशानियों से छुटकारा करते की प्रार्थना की। बाद में संयोग से उनके आने का फोन मेरे फोन पर आ गया। दरअसल मेरा फोन नंबर और उन मिष्ठान विक्रेता का नंबर आगे पीछे था। मुझे ठीक याद है बारिश की रात सूरदास संत जी फोन मेरे पास आया था। जब उन्होंने उनसे बात करने का कहा तो मैंने सच्चाई बताई कि नंबर में यह फर्क है, लेकिन उनके आग्रह पर मैंने उनका संदेश मिष्ठान विक्रेता जी को दे दिया।
कुछ दिन बाद सूरदास संत का शुभ आगमन उनके निवास पर हुआ। संयोग से मैं पत्नी सहित उसी दिन मिष्ठान लेने उनकी दुकान पर गया। और उनसे मिलने का मौका मिला। उन्होंने प्रसाद स्वरूप मुझे दो लौंग दी ओर दीप जलाने का कहा था।
बाहरहाल उन्होंने उस मकान में कुछ तांत्रिक उपाय किए। वह मकान बाधा से मुक्त हुआ। बाद मैं उन्होंने बताया कि उनकी मिष्ठान केंद्र पर ही मिठाइयों की ट्रे अपने आप खाली हो जाती थी। कुछ उसका भी उपचार सूरदास ने किया था और उस समस्या से भी मुक्ति मिली। कुछ अन्य लोगों के स्थानों से इस तरह की दुष्ट आत्माओं को उन्होंने गंगा जी में जाकर विसर्जित कर मुक्ति प्रदान की थी। उन्होंने सर्किट हाउस के बाजू में एसडीओ दफ्तर के सामने स्थित सुप्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान जी मंदिर में यज्ञ हवन भी किया था।
ऐसी घटनाओं के नेपथ्य में क्या होता है यह तो ईश्वर ही जाने, लेकिन यह तो प्रमाणित होता है कि कहीं ना कहीं कोई ना कोई होता है। नर्मदे हर


पंकज पटेरिया (Pankaj Pateriya)
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
ज्योतिष सलाहकार
9893903003
9340244352

(नोट: झरोखा की इस सीरीज की किसी कड़ी का बगैर संपादक अथवा लेखक की इजाजत के बिना कोई भी उपयोग करना कानूनन दंडनीय है। सर्वाधिकार सुरक्षित हैं।)

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