करवा चौथ व्रत 2022 : जाने शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, कथा और सम्‍पूर्ण जानकारी

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करवा चौथ व्रत, महत्‍व, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, पूजा विधि, व्रत कथा, करवा चौथ माता की आरती, व्रत मंत्र जाने सम्‍पूर्ण जानकारी 2022 

करवा चौथ व्रत (Karva Chauth Fast)

हिन्‍दू कलैण्‍डर के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ व्रत रखा जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। हिन्‍दू धर्म में करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व होता है। करवा चौथ व्रत को सभी व्रतों में कठिन माना जाता है।

यह व्रत महिलाएं बिना जल ग्रहण कियें बिना रखती हैं। और चंद्र दर्शन के बाद व्रत को खोलती हैं। ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ व्रत पूर्ण विधि‍-वि‍धान से करने पर पति को दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है।

करवा चौथ व्रत महत्‍व (Karva Chauth Fasting Significance)

करवा चौथ व्रत

करवा चौथ व्रत का हिन्‍दू धर्म में अत्‍यधिक महत्‍व होता हैं। पौराणिक मान्यता हैं कि चंद्रमा की पूर्ण श्रद्धा-भाव से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन सुखी होता है और पति की आयु लंबी होती है। हिंदू धर्म शास्त्रों में उम्र, सुख-सम्रद्धि और शांति का रूप माना जाता है।

करवा चौथ शुभ मुहूर्त (Karva Chauth Auspicious Time)

करवा चौथ व्रत

  • इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 13 अक्टूबर,2022 दिन गुरुवार को रखा जायेगा।
  • करवा चौथ व्रत पूजा मुहूर्त : 13 अक्‍टूबर,2022 दिन गुरुवार शाम 5:43 से शाम 6:59 मिनट तक।
  • चतुर्थी तिथि आरंभ : चतुर्थी 13 अक्टूबर, गुरूवार को प्रातः 3:1 मिनट से शुरू होगी।
  • चतुर्थी तिथि समाप्त : 15 अक्टूबर, शुक्रवार के दिन प्रातः 5:43 मिनट पर समाप्त।
  • चंद्रोदय संभावित रात 9 बजकर 7 मिनट पर पूर्ण चन्द्रमा दिखाई देगा।

करवा चौथ व्रत पूजन सामग्री (Karva Chauth Fasting Material)

करवा चौथ व्रत

चंदन, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर,  शुद्ध घी, दही, मिठाई, गंगाजल, अक्षत (चावल), सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी,  बिछुआ, मिट्टी का करवा और ढक्कन,  दीपक, रुई, कपूर, गेहूं, शक्कर का बूरा, हल्दी, जल का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, चलनी, आठ पूरियों की अठावरी आदि।

करवा चौथ व्रत पूजा विधि (Karva Chauth Vrat Puja Method)

  • करवा चौथ व्रत के दिन सुबह प्रात: जल्दी उठकर स्नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करना करें।
  • स्नान करने के बाद मंदिर की साफ-सफाई कर निर्जला व्रत का संकल्‍प लें।
  • शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, और भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा करें।
  • चंद्र उदय होते ही चंद्र दर्शन करें और पति को छलनी से देखें।
  • इसके बाद पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तोड़ा जाता है।

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करवा चौथ व्रत कथा (Karva Chauth Fasting Story)

करवा चौथ व्रत

पौराणिक कथा के अनुसार प्रस्थपुर गाँव में वेद शर्मा नाम का ब्राम्हण रहता था। ब्राह्मण वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ। जिससे उन्हें 7 गुणवान पुत्र और एक सुंदर कन्‍या की प्राप्‍ति हुई। उनकी पुत्री का नाम वीरवती था। वीरवती सात भाइयों में सबसे छोटी थी इसलिए अपने माता-पिता और भाइयों की प्रिय थी।

कुछ सालो बाद वीरवती का विवाह एक योग्य ब्राह्मण से हुआ। शादी के बाद एक करवा चौथ के दिन वीरवती अपने भाइयों के घर पर आई। कार्तिक माह की चौथ पर वीरवती ने अपनी भाभियों के साथ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत का रखा। लेकिन व्रत रखने के कारण वीरवती का स्वास्थ्य खराब हो गया।

बहन की खराब हालत देखकर वीरवती के भाईयों ने एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन चंद्रमा को अर्ध्यत देकर व्रत खोल सके। योजना के अनुसार एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर दिया लेकर चढ़ गया और फिर बाकि भाइयों ने अपनी बहन से कहा कि चंद्रमा आ गया हैं।

अपने भाइयों की बातों का विश्वास कर वृक्ष पर छलनी के पीछे से चंद्रमा को अर्ध्यत दिया और अपना व्रत खोल लिया। लेकिन जैसे ही वीरवती ने अपना भोजन शुरू किया तभी उसके ससुराल से खबर आयी की उसके पति की मृत्यु हो चुकी हैं। इस खबर को सुन वीरवती रोने लगी और व्रत के दौरान अपनी किसी चूक के लिए स्वयं को दोषी ठहराने लगी।

उसके दुखी मन को देख देवराज इंद्र की पत्नी इन्द्राणी वहां प्रकट हुई। तभी वीरवती ने देवी इन्द्राणी से अपने पति की मृत्यु का कारण पुछतें हुए अपने पति को पुनर्जीवित करने के लिए प्रार्थना करने लगी। तब देवी इन्द्राणी ने वीरवती से कहा “तुमने चंद्रमा को अर्ध्य दिए बिना ही अपना व्रत तोड़ लिया था।

जिसके कारण तुम्हारे पति की मृत्यु हो गई। लेकिन ये भूल तुमसे अनजाने में हुई है इसलिए में तुम्हारे पति को जीवित तो नहीं कर सकती पर उसे जीवित करने का रास्ता बता सकती हूँ” और कहा की ”वीरवती तुम्हे अब से हर माह की चतुर्थी पर पूरी श्रद्धा से व्रत करना होगा। तभी तुम्हारा पति पुनः जीवित हो सकता है” वीरवती ने देवी के कहे अनुसार वैसा ही किया और हर माह की चतुर्थी पर व्रत, पूजा-पाठ किया। जिससे वीरवती का पति पुनः जीवित हो गया।

करवा चौथ माता की आरती (Karva Chauth Mata Aarti)

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।। ओम जय करवा मैया।

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी। यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती। दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।

होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे। गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।

करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे। व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे।।

ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।

करवा चौथ व्रत मंत्र (Karva Chauth Fasting Mantra)

ॐ शिवायै नमः 

ॐ नमः शिवाय 

ॐ गणेशाय नमः

ॐ सोमाय नमः

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