रितेश राठौर, केसला। क्षेत्र के किसानों और आदिवासियों के हक में संघर्षरत संगठनों—’किसान आदिवासी संगठन’ एवं ‘समाजवादी जनपरिषद केसला’ ने प्रदेश सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने दो साल पहले स्वीकृत हुई ‘दौड़ी सिंचाई परियोजना’ का निर्माण कार्य अब तक शुरू न होने पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए जानकारी साझा की है।
मंत्री का आश्वासन फेल, बरसात शुरू पर काम बंद
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि कुछ समय पूर्व जब क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भोपाल के वल्लभ भवन में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से मिले थे, तब मंत्री ने भरोसा दिलाया था कि बरसात शुरू होने से पहले हर हाल में दौड़ी सिंचाई परियोजना का काम शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, अब मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन धरातल पर काम की एक ईंट भी नहीं रखी गई है।
₹154 करोड़ की योजना, 32 गांवों का भविष्य दांव पर
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में विधायक प्रेम शंकर ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन किया गया था। लगभग 154 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से क्षेत्र के 32 गांवों के किसानों को सिंचाई का पानी मिलना प्रस्तावित है।संगठन ने तीखे सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब दो साल पहले ही योजना को शासकीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी थी, तो ऐसी कौन सी कानूनी अड़चन या तकनीकी खराबी आ गई है, जिसके कारण काम रुका हुआ है?
“सिर्फ फोटो खिंचवाने और वोट लेने में व्यस्त हैं नेता”
विज्ञप्ति में जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा गया है, “ऐसा लगता है कि क्षेत्र के विधायक और अन्य नेता मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाने के बाद जनता के मुद्दों को भूल चुके हैं। चुनाव के समय वोट मांगने वाले सांसद को भी इन गरीब विस्थापितों और आदिवासियों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। क्या सरकार गरीब दलित-आदिवासी किसानों को सिर्फ खोखले आश्वासन देना जानती है?”
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, जल्द काम शुरू करने की मांग
पूर्व जनपद अध्यक्ष गनपत उइके ने सरकार की इस लेट-लतीफी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार को तुरंत नींद से जागना चाहिए और इस परियोजना को शुरू करना चाहिए।इस संबंध में किसान आदिवासी संगठन और समाजवादी जनपरिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र भी सौंपा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र के लोगों के सम्मानजनक जीविकोपार्जन के लिए इस सिंचाई परियोजना का काम अविलंब शुरू किया जाए, अन्यथा किसान और आदिवासी समाज चुप नहीं बैठेगा।











