इटारसी। करीब सात वर्ष पुराने दहेज प्रताडऩा और हत्या मामले में न्यायालय ने आज आरोपी मां-बेटे को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। न्यायालय ने इसे जघन्य हत्याकांड माना है, जिसमें मां और बेटी की दहेज प्रताडऩा मामले में जलने से मौत हो गयी थी। न्यायालय ने इसमें धारा 302 का भी इजाफा किया था, हालांकि फैसला धारा 304 बी दहेज हत्या का आया है।
शासन की ओर से पैरवी सहायक लोक अभियोजक भूरेसिंह भदौरिया, फरियादी की ओर से अधिवक्ता पारस जैन ने पैरवी की थी। मामले में आरोपी किरण ओनकर और अमित ओनकर को आजीवन कारावास की सजा ओर 1500-1500 रुपये जुर्माना लगाया है।
सन् 2015 में नाला मोहल्ला के इस बहुचर्चित मामले में दहेज प्रताडऩा से परेशानी महिला ने अपनी छोटी सी बच्ची को गोद में लेकर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। एजीपी भूरेसिंह भदौरिया ने बताया कि न्यायालय ने उपरोक्त प्रकरण को बहुत ही गंभीर अपराध मानते हुए आरोपियों को दंडित किया है। द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश कु सविता जडिय़ा की अदालत ने आरोपियों को दंडित किया है।
विधि विद्वानों का मानना है कि मामले में आजीवन कारावास की सजा होना ही मामले की गंभीरता को दर्शाता है, दहेज प्रताडऩा और अन्य दहेज हत्या जैसे मामलों में अधिकतम सात या दस वर्ष तक की सजाएं होना आम बात है, आजीवन कारावास की सजा ही मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
सात वर्ष पुराने दहेज हत्या मामले में आरोपी मां-बेटे को आजीवन कारावास


Rohit Nage
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