- एसडीएम के नेतृत्व में तीन विभागों की संयुक्त टीम ने मारा छापा, बिना लाइसेंस चल रहा एक कैटरर्स का कारखाना सील
इटारसी। खाद्य सुरक्षा विभाग, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने आज रेलवे स्टेशन पर खानपान की सप्लाई करने वाले कारखानों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस छापामारी से स्टेशन पर यात्रियों की सेहत के साथ किए जा रहे बड़े खिलवाड़ का भंडाफोड़ हुआ है। टीम ने 12 बंगला क्षेत्र में स्थित तीन बड़े कारखानों पर दबिश देकर करीब साढ़े पांच क्विंटल (550 किलो) दूषित खाद्य पदार्थ मौके पर ही नष्ट करवाए हैं।
सड़े आलू, बदबूदार ग्रेवी और एक्सपायर्ड ब्रेड से बन रहा था खाना

प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से 12 बंगला इलाके में हड़कंप मच गया। टीम ने जब कारखानों के अंदर का नजारा देखा तो अधिकारी भी दंग रह गए। यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन के नाम पर वहां भयंकर गंदगी के बीच सड़े हुए आलू, बदबूदार समोसे, खराब हो चुकी ग्रेवी, एक्सपायर्ड ब्रेड, अंडे, घटिया मसाले और सड़ी-गली सब्जियां रखी हुई थीं। टीम ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए इन सभी दूषित सामग्रियों को जब्त कर नष्ट करवा दिया। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के करीब छह सैंपल भी जांच के लिए जब्त किए हैं।
बिना लाइसेंस चल रहा कारखाना सील
जांच के दौरान टीम को एक कारखाने में भारी अनियमितता मिली। संबंधित कैटरर्स के पास खाद्य विभाग का वैध लाइसेंस तक नहीं था। बिना लाइसेंस और तय मानकों का उल्लंघन कर यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ करने के आरोप में इस कारखाने को तुरंत सील करने की कार्रवाई की जा रही है।
राहुल इंटरप्राइजेस, अतुल और होटल धर्मराज पर एक्शन
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह बड़ी कार्रवाई 12 बंगला स्थित राहुल इंटरप्राइजेस, अतुल और होटल धर्मराज के कारखानों में की गई है। करीब एक दर्जन से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की इस संयुक्त टीम का नेतृत्व खुद एसडीएम नीलेश शर्मा कर रहे थे। टीम में पुलिस विभाग से एसडीओपी वीरेन्द्र मिश्रा, तहसीलदार सुनीता साहनी, खाद्य सुरक्षा विभाग से खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश दियावर, जितेन्द्र राणा सहित तीनों विभागों के अन्य कर्मचारी मुख्य रूप से शामिल रहे।
लगातार कार्रवाई न होने से हौसले बुलंद
12 बंगला स्थित इन खानपान के कारखानों पर बहुत दिनों बाद इस तरह की कोई बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी यहां कई बार बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं, लेकिन प्रशासन की जांच में निरंतरता नहीं रहने के कारण यह अवैध और जानलेवा धंधा कुछ दिनों बाद पुन: फलने-फूलने लगता है। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी कार्रवाई के बाद क्या प्रशासन इन मिलावटखोरों पर आगे भी नकेल कस कर रखता है या नहीं।
आखिर कब तक यात्रियों की थाली में परोसा जाता रहेगा ‘धीमा जहर’?
12 बंगला के कारखानों में आज जो सड़े हुए आलू, बदबूदार ग्रेवी और एक्सपायर्ड ब्रेड का जखीरा मिला है, उसने एक बेहद डरावना सवाल खड़ा कर दिया है। न जाने कब से, कितनी ही ट्रेनों में यह दूषित खाना हर दिन सप्लाई किया जा रहा था? न जाने देश के किस-किस कोने से आने वाले कितने मासूम यात्रियों को यह ‘धीमा जहरÓ परोसा गया होगा? इसका सटीक आकलन कर पाना शायद किसी के बस में नहीं है। रेलवे का सफर करने वाले न जाने कितने मुसाफिर सफर के दौरान या घर पहुंचकर अचानक बीमार हुए होंगे, कितनों का स्वास्थ्य बिगड़ा होगा—इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। आज की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि चंद मिलावटखोरों के लिए यात्रियों की जान की कोई कीमत नहीं है।
खानापूर्ति नहीं, अब चाहिए ‘जीरो टॉलरेंस’
स्टेशन पर केवल खाना बेचना एक व्यवसाय हो सकता है, लेकिन सड़ा-गला खाना परोसना सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है। 12 बंगला के इन कारखानों पर पहले भी कार्रवाई हुई है, लेकिन हकीकत यही है कि जैसे ही प्रशासन शांत बैठता है, यह जानलेवा धंधा फिर से फलने-फूलने लगता है।
अब थमे न जांच का पहिया
यदि वाकई में यात्रियों को इस गंभीर खतरे से बचाना है, तो प्रशासन को ‘संडे टू मंडेÓ वाली कागजी कार्रवाई से आगे निकलना होगा। यह कार्रवाई कोई एक दिन का ‘इवेंट’ बनकर न रह जाए, बल्कि खाद्य सुरक्षा विभाग, राजस्व और पुलिस की इस टीम को हर हफ्ते, हर महीने बिना बताए ऐसे औचक निरीक्षण करने होंगे।
जब तक इन मिलावटखोरों के मन में कानून का खौफ नहीं होगा और जब तक यह जांच निरंतर नहीं चलेगी, तब तक यात्रियों की सेहत पर मंडराता यह खतरा कभी खत्म नहीं होगा। प्रशासन ने आज एक बेहतरीन शुरुआत की है, लेकिन अब उम्मीद इस बात की है कि यह कड़ा रुख आगे भी बरकरार रहेगा।











