इटारसी। कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं और बदहाली का घड़ा फूट गया। मंडी प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता से त्रस्त होकर आक्रोशित व्यापारियों ने सोमवार सुबह मंडी में नीलामी कार्य पूरी तरह बंद कर दिया। कल हुई बारिश के कारण मंडी परिसर में रखा किसानों और व्यापारियों का लाखों रुपये का अनाज पानी में भीगकर बर्बाद हो गया, जिससे दोनों पक्षों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
टैक्स वसूली में अव्वल, सुविधाएं शून्य
व्यापारियों ने मंडी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा मंडी टैक्स में तो बढ़ोतरी कर दी गई है, लेकिन इसके बदले में मिलने वाली सुविधाएं और सुरक्षा पूरी तरह नदारद हैं। मंडी सुधार और रखरखाव के नाम पर हर साल कागजों पर लाखों रुपये फूंक दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है।
मंडी की बदहाली के 5 मुख्य बिंदु
- टीन शेड बने छलनी : मंडी के टीन शेड इस कदर जर्जर हो चुके हैं कि बारिश होते ही उनसे पानी टपकने लगता है। शेड के नीचे रखा अनाज पूरी तरह भीग रहा है।
- अंधेरे में मंडी : परिसर में पर्याप्त बिजली और लाइटिंग की व्यवस्था नहीं है, जिससे रात के समय सुरक्षा का खतरा बना रहता है।
- गंदगी का अंबार : पूरे मंडी परिसर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है। जगह-जगह कचरे और सड़ांध मारती गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
- बूंद-बूंद पानी को तरसते लोग : मंडी में आने वाले किसानों और व्यापारियों के लिए स्वच्छ पेयजल (पीने के पानी) की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है।
- शो-पीस बना विश्रामगृह : किसानों के आराम के लिए बनाया गया किसान विश्रामगृह मूलभूत सुविधाओं के अभाव में केवल एक शो-पीस बनकर रह गया है, जिसका किसान उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
टैक्स पूरा लेते हैं, पर सुरक्षा नहीं
मंडी में अनाज लेकर पहुंचे किसानों में भी प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया। किसानों का कहना है कि कृषि उपज मंडी उनसे हर साल लाखों रुपये का टैक्स वसूलती है, लेकिन जब संकट आता है तो उनकी फसल को मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए एक अदद सही शेड तक नसीब नहीं होता। मंडी की इस नाकामी की सजा सीधे तौर पर अन्नदाता को भुगतनी पड़ रही है
व्यवस्था सुधरने तक बंद रहेगी नीलामी
व्यापारियों और किसान संगठनों ने दोटूक शब्दों में मंडी प्रशासन को चेतावनी दी है कि जब तक जर्जर टीन शेडों की मरम्मत नहीं होती, परिसर की सफाई, बिजली और शुद्ध पेयजल की सुचारू व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक मंडी में नीलामी कार्य पूरी तरह ठप रहेगा। अब देखना होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया मंडी प्रशासन इस भारी नुकसान के बाद जागता है या किसानों-व्यापारियों को यूं ही परेशान होना पड़ेगा।
प्रबंधन और व्यापारियों के बीच विवाद
व्यापारियों के काम बंद कर देने के बाद मंडी सचिव प्रशांत पांडेय के केबिन में चर्चा के लिए बैठक हुई जिसमें सचिव और व्यापारियों के मध्य विवाद हो गया है। व्यापारी दीपांशु अग्रवाल ने कहा कि सचिव का रवैया सहयोगात्मक न होकर आक्रामक रहा है। हम व्यापारी हैं, लडऩा हमारा धर्म नहीं लेकिन अपने हक की बता करना भी जरूरी है, बारिश से व्यापारियों और किसानों का लाखों का नुकसान हुआ है, जिसे सचिव हल्के में ले रहे हैं।
मंडी में अव्यवस्था
मंडी सचिव ने जब से यहां व्यवस्था संभाली है, वे अपडाउन करते हैं, शाम को भोपाल चले जाते हैं, कहने को मंडी में करीब चालीस कर्मचारी हैं, लेकिन शाम के बाद यहां कोई भी नहीं रहता है, हमारा माल चोरों के हवाले रहता है, कल शाम को भी मंडी परिसर में सैंकड़ों की संख्या में मवेशी घुस गये, कोई कर्मचारी नहीं था, उनको भगाने के लिए यह मंडी परिसर किसके भरोसे है?
किसान आया रोड पर
मंडी प्रबंधन से व्यापारी और किसान दोनों नाराज हैं, अपनी बात नहीं सुने जाने और ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद किसान मंडी गेट के सामने रोड पर आ गया है, किसानों ने रोड बंद करने का पूरा इंतजाम कर लिया है, समाचार लिखे जाने तक समस्या का समाधान नहीं निकला है।











