इटारसी। श्री द्वारिकाधीश मंदिर में पुरुषोत्तम मास के पावन पर्व पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस में पंडित सौरभ दुबे ने भागवत कथा का प्रारंभ भागवत के प्रथम स्कंध के मंगलाचरण से प्रारंभ किया। कथा के मध्य उन्होंने भीष्म पितामह के जीवन प्रसंगों का स्मरण कराया और बताया कि मृत्यु शैय्या पर उन्होंने अपने परिवार और समाज को उपदेश दिया था कि राजा का प्रथम कर्तव्य है कि वह प्रजा का पालन पुत्रवत करे, न्याय और धर्म को सर्वोपरि रखे और अंत में प्रभु भक्ति के बल पर मोक्ष को प्राप्त करे। श्रीकृष्ण के समक्ष भीष्म का देहावसान त्याग, तप, क्षमा और दया का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अंत समय में भीष्म अपने कर्मों का चिंतन करते हुए स्वयं को दोषमुक्त नहीं मानते, लेकिन भक्ति, सत्य और समर्पण के बल पर कृष्ण के सम्मुख उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्यास जी ने कलयुग के दुर्गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि आज मन में क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और छल का वास बढ़ता जा रहा है। इससे बचने का सबसे सरल और सिद्ध मार्ग राम नाम का जप ही है। कथा प्रारंभ होने के पूर्व राजाराम सेन, श्रीमती इंदिरा सेन, आशीष सेन, श्रीमती झलक सेन, कुंदन श्रीवास, रक्षा श्रीवास, विकास श्रीवास, प्रतीक्षा श्रीवास ने भागवत महापुराण का पूजन अर्चन किया एवं कथा व्यास पंडित सौरभ दुबे को पुष्प हार अर्पित किए। गर्मी को देखते हुए आयोजन समिति के द्वारा श्री द्वारिकाधीश मंदिर परिसर में पर्याप्त कूलर एवं शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई है। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से 5 तक की जा रही है। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु पधार रहे हैं।











