इटारसी। मरीजों के परिजनों और अस्पताल के बीच बेहतर समझ एवं सहयोग का वातावरण बनाने के लिए आम जनता का जागरूक होना बेहद आवश्यक है। अक्सर इलाज के दौरान होने वाले झगड़े, विवाद एवं अनावश्यक तनाव को कम करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, जिनकी जानकारी हर नागरिक को होनी चाहिए।
मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा 10 अगस्त 2026 को प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों में स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों पर होने वाले हमलों और दुर्व्यवहार को रोकने के लिए ‘मध्यप्रदेश चिकित्सक तथा चिकित्सा सेवा से संबद्ध व्यक्तियों की सुरक्षा अधिनियम, 2008, को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिनियम के तहत सजा के कड़े प्रावधान
- अधिनियम की धारा 3 के तहत अस्पताल, क्लिनिक या एंबुलेंस में ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्य कर्मी के साथ हमला, आपराधिक बल प्रयोग या धमकी देना पूर्णत: प्रतिबंधित है।
- धारा 4 के अनुसार, इन नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को तीन महीने तक का कारावास या 10,000 रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।
- धारा 5 के तहत चिकित्सा कर्मियों पर किया गया हमला एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा।
अस्पतालों के लिए जारी प्रमुख निर्देश
- नियमों का प्रदर्शन : चिकित्सालय के मुख्य प्रवेश द्वारों, बाह्य रोगी कक्ष, और बिलिंग काउंटरों के पास इन दंडात्मक प्रावधानों को हिंदी व अंग्रेजी में बड़े अक्षरों वाले बोर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
विजिटर पास पॉलिसी : अस्पतालों के संवेदनशील क्षेत्रों में भीड़ कम करने के लिए प्रत्येक मरीज के साथ अधिकतम 1-2 परिजनों के लिए ही ‘विजिटर पास पॉलिसी’ लागू की जाएगी। - 6 घंटे में एफआईआर : यदि ड्यूटी के दौरान किसी स्वास्थ्य कर्मी के साथ हिंसा होती है, तो संस्थान के प्रमुख को घटना के अधिकतम 6 घंटे के भीतर ‘इंस्टीट्यूशनल एफआईआर’ दर्ज करानी होगी।
- सीसीटीवी और पुलिस समन्वय : अस्पताल परिसर के सभी ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ पर नाइट-विजन और हाई डेफिनिशन वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही, आपातकालीन स्थिति के लिए नजदीकी पुलिस स्टेशन से सीधा संपर्क स्थापित किया जाएगा।
- महिला सुरक्षा : महिला चिकित्सक एवं कर्मचारियों की लैंगिक हिंसा से सुरक्षा के लिए अस्पतालों में ‘आंतरिक शिकायत समिति’ का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसमें 50 प्रतिशत महिला सदस्य होंगी।
- सुरक्षा गश्त और प्रकाश व्यवस्था : अस्पताल परिसरों, छात्रावासों और डार्क स्पॉट्स में 24&7 पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाएगी और सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच सुरक्षा गार्डों द्वारा नियमित गश्त की जाएगी।











