---Advertisement---
mayank mehto (2)
PlayPause
previous arrow
next arrow
1003320064 (1)
previous arrow
next arrow

मां नर्मदा जीवित इकाई है, इस बेरहमी से रेत उत्खनन इसके प्रबंधन को खत्म करेगा

By
Last updated:
Follow Us
Bachpan play school advertisement

नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के लिए महत्वपूर्ण नर्मदा (Narmada) जो जीवन दायनी कहलाती है, कृषि की आवश्यकता पूर्ण कर रही है, नागरिकों की प्यास बुझा रही है, घरों को रोशन करने, उद्योग चलाने विद्युत उत्पादन में अपना योगदान नर्मदा देती ही है। निर्माण कार्य हेतु रेत भी उपलब्ध यहीं से हो रही है, परंतु जिस अवैज्ञानिक और अवैधानिक तरीके से तटों से, नर्मदा के अंदर से रेत का उत्खनन हो रहा है, उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा जिम्मेदार अधिकारी चाहे कलेक्टर (Collector) हों, एसपी (SP) हों, माइनिंग अधिकारी (Mining Officer) हों, सब आंख मूंद कर बैठे हैं।

सरकार के बनाये नियमों के पालन की जिम्मेदारी जिले के अधिकारियों की होती है और जब अधिकारी नियमों का पालन नहीं करते हैं तो अराजक तत्वों के हौंसले बुलंद होते हैं, वो बेधड़क होकर अवैध कार्य करते हैं, बड़ी पोकलेन मशीनों (Poklane Machines) से उत्खनन, बीच नर्मदा तक आकर ट्रैक्टर (Tractors) मशीनों से, पनडुब्बी से चल रहा खनन अति संवेदनशील विषय है। यह नर्मदा की पर्यावरण तंत्र को नष्ट करेगा, करोड़ों लोगों के साथ, सैकड़ों प्रकार की जैव विविधता को नष्ट करने का कुत्सित प्रयास इन रेतासुरों की करतूत के कारण होगा। इसे संवेदनशील विषय मानकर कार्य करने की आवश्यकता है।

पूर्व नपाध्यक्ष ने अफसरों को भेजी चूड़ी

नर्मदापुरम नगर पालिका (Narmadapuram Municipality) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अखिलेश खंडेलवाल (Dr. Akhilesh Khandelwal) ने नर्मदा से अवैज्ञानिक और अवैधानिक तरीके से रेत उत्खनन रोकने में असफल सीहोर प्रशासन (Sehore Administration) को चूड़ी भेजने का अभियान प्रारंभ किया है। उन्होंने कोरियर के माध्यम से कलेक्टर, एसपी और खनिज अधिकारी को चूडिय़ों भेजी हैं, इस लानत के साथ कि सबकुछ स्पष्ट दिखने के बावजूद अधिकारियों की आंखों में ऐसा कौन सा मोतियाबिंद है, जो उन्हें उत्खनन नहीं दिखाई देता। नर्मदा के उस पार जहां सीहोर जिले की सीमा लगती है, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) का गृह क्षेत्र, विधानसभा लगती है। नर्मदापुरम (Narmadapuram) में सर्किट हाउस से, सेठानी घाट से, कोरी घाट से, यहां तक कि कलेक्ट्रेट के पास से भी स्पष्ट देखा जा सकता कि रेत माफिया कितनी तेजी से अवैध उत्खनन करके नर्मदा का सीना छलनी कर रहा है, बावजूद इसके अफसरों को यह क्यों नहीं दिखाई देता है। देखना है कि पूर्व नपाध्यक्ष खंडेलवाल का यह अभियान अफसरों का जमीर जगायेगा? यदि सोया होगा तो जाग सकता है, मर ही गया होगा तो फिर जिंदा होने की उम्मीद करना बेमानी होगी।

Rohit Nage

रोहित नागे वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार संपादक हैं, जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातक किया है तथा लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। अपने पत्रकारिता जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, नवभारत सहित अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में रिपोर्टर, उप-संपादक, ब्यूरो प्रमुख एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य किया है। वे Narmadanchal.com के रिपोर्टर, उप-संपादक, एवं न्यूज़ इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे हैं और नर्मदांचल क्षेत्र की निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय समाचारों पर विशेष रूप से लेखन एवं संपादन कार्य कर रहे हैं।

For Feedback - info[@]narmadanchal.com
Join Our WhatsApp Channel

Advertisement

[adrotate banner="5"]

Related News

[adrotate banner="9"]

Leave a Comment

Narmadanchal News
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.