तिलक सिंदूर की गुफाओं के बीच है पचमढ़ी जैसा बी फाॅल, जहां 300 फीट ऊंचाई से गिरता है पानी

तिलक सिंदूर की गुफाओं के बीच है पचमढ़ी जैसा बी फाॅल, जहां 300 फीट ऊंचाई से गिरता है पानी

बरसात के दिनों में झरने का अदभुत सौन्दर्य देखते ही बनता है

इटारसी। पचमढ़ी बी फाॅल(Pachmarhi B fall) तो सभी बहुत घूमे होंगे लेकिन इटारसी तिलकसिंदूर(Tilak sindoor) के महादेव मंदिर(Mahadev Mandir) से दो किलोमीटर दूर गुफाओं के बीच नागनखो झरना(Naagnkho Jharna) है। इन सतपुडा की पहाडी पर भगवान भोलेनाथ का मंदिर भी है। जहां गुफाओं के बीच से कई फीट ऊंचाई से पानी गिरता है। और यह मनोरम दृश्य देखते ही बन ता है। रविवार को आदिवासी सेवा समिति के सदस्य नागनखो झरना पहुंचे। जहां पर लगभग 250 से 300 फीट की ऊंचाई से पानी गिरने से सुंदर जल प्रपात(Beautiful waterfall) बन गया है। आसपास के काफी व्यक्ति झरने को देखने पहुंच रहे हैं। इस झरने के पास पहाड़ी में गुफाएं हैं। गुफाओं में उकेरी हुई आकृतियां हैं। गुफाएं ऐसी हैं कि लगभग 150 से 200 लोग बैठकर खाना खा सकते हैं।

गौंड राजाओं के बने पत्थर है आकर्षिक का केंद्र
आदिवासी सेवा समिति के अध्यक्ष बलदेव तेकाम के अनुसार इस झरने के आसपास नीलगढ की पहाडी है जहां पुराने जमाने के गौंड राजाओं के बनाए पत्थरों के घर देखने केा मिलते हैं। समिति के मीडिया प्रभारी विनोद वारिवा ने बताया कि नागनखो झरने मे लगभग 200 से 300 फिट की ऊंचाई से पानी गिरता हुआ नजर आया । यहा पर आसपास के काफी लोग झरने को देखने पहुंच रहे हैं।इस झरने के आसपास पहाड़ी गुफाएं व सुरंग है।

यहां अकेले जाने से बचे
लेकिन यहां अकेले जाने से बचें। जंगल क्षेत्र होने से यह वन्य प्राणियों का विचरण क्षेत्र है। यहां पर जंगली जानवर का डर भी बना रहता। बताया जाता है कि यहां शेर, चीता, भालू आदि घुमते हैं। गुफाएं पर बने नगीने के चित्र भी साफ दिखाई देते हैं। यह झरना तिलक सिदूर से 2 किलोमीटर दूर है।

यह टीम पहुंची देखने
इस दौरान समिति अध्यक्ष बलदेव तेकाम, सचिव जीतेंद्र, इवने जगदीश, ककोडिया, बद्री धुर्वे, जितेंद्र भलावी, धनराज परते, सुखराम परते, मनीष डब्बू, दीपक बाबरिया, रवि चोधरी, गौरव चोधरी, विनोद सैनी, विशाल कौशल समिति के मिडिया प्रभारी विनोद वारिवा उपस्थित रहे।

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