Chhath Parv 2020: नहाय-खाय के साथ आज से 4 दिनी छठ महापर्व शुरु

Chhath Parv 2020: नहाय-खाय के साथ आज से 4 दिनी छठ महापर्व शुरु

कल मीठे चावल के साथ होगा खरना (Kharna)

इटारसी। बिहार के मूल निवासी परिवारों में आज से लोक आस्था का महापर्व छठ (Mahaparva Chhath) का आगाज हो गया है। पहले दिन बुधवार को नहाय-खाय (Nahae Khay) के साथ इसकी शुरुआत हुई। इस निर्जला अनुष्ठान के पहले दिन व्रती घर, नदी, तालाबों आदि में स्नान कर अरवा चावल, चने की दाल और बिना लहसुन प्याज की शुद्ध कद्दू की सब्जी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। 19 नवंबर, गुरुवार को खरना (Kharna) करेंगे। इस दिन मीठा चाल, बिना नमक की लौकी की सब्जी खायी जाती है। व्रती दिनभर निर्जला उपवास (Nirjala Upwas) रखने के बाद शाम को दूध और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद खाकर चांद को अघ्र्य देकर और लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत उपवास शुरू करते हैं। 20 नवंबर को व्रती डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य देंगे और 21 नवंबर को उदयीमान सूर्य को अघ्र्य देने के साथ महाव्रत संपन्न करेंगे। सूर्य को अघ्र्य देने के बाद प्रसाद वितरण करेंगे और अन्न-जल ग्रहण (पारण) कर चार दिवसीय अनुष्ठान समाप्त करेंगे।

इटारसी शहर में पथरोटा नहर (Pathrotha Nahar) के पास बिहारी कालोनी (Bihari Colony) में नहर किनारे छठ महापर्व की पूजा होती है। बिहारी समाज ने अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में आवेदन देकर छठ महापर्व पर कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए पूजन की अनुमति मांगी है। समाज के वरिष्ठ सदस्य अधिवक्ता रघुवंश पांडेय (Advocate Raghuvansh Pandey) ने बताया कि 20 की शाम को पथरोटा नहर पर डूबते सूर्य को जल से अघ्र्य देकर पूजा होगी और 21 नवंबर को सुबह उगते सूर्य को कच्चे दूध से अघ्र्य देकर व्रत का समापन होता है।

नहर में है पर्याप्त पानी
पिछले कुछ वर्षों में नहर में पानी नहीं होने से बिहारी समाज को पथरोटा नहर पर पूजा करने में बड़ी दिक्कतें आती रही हैं। समाज के लोग कलेक्टर के अलावा सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी मिलकर तवा बांध से पानी छोडऩे की मांग करते रहे हैं। इस वर्ष नहर में पर्याप्त पानी है। दरअसल, इस वर्ष यह पर्व दीपावली की तरह करीब एक माह देर से आया। इस दौरान फसलों को पानी की दरकार के कारण नहरों से करीब एक पखवाड़ा पूर्व ही पानी छोड़ा गया है। अत: नहर में पर्याप्त पानी होने से समाज को अब सूर्य को अघ्र्य देने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दरअसल, बिहारी समाज के सदस्य कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को शाम का अघ्र्य देते हैं, यह किसी जलस्रोत में ही किया जाता है।

कब क्या होगा
– 18 नवंबर बुधवार नहाय-खाय
– 19 नवंबर गुरुवार खरना
– 20 नवंबर शुक्रवार डूबते सूर्य को अघ्र्य
– 21 नवंबर शनिवार उगते सूर्य को अघ्र्य

चतुर्थी – स्नान करके, शुद्ध भोजन बिना लहसुन-प्यास के चावल-दाल, कद्दू की सब्जी,
पंचमी – स्नान कर चंद्रोदय पर शुद्ध घी लगी गेहूं की रोटी व खीर खाकर व प्रसाद वितरण
षष्ठी – ठेकुआ पकवान बनेगा। यह पूजा का मुख्य प्रसाद होता है। पूजा में नारियल, केला, नीबू, गन्ना और ऋतुफल का भी प्रसाद होता है।

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