Navratri Special: नर्मदानगरी(Narmadanagri) में होते है तंत्र साधना के आराध्य देवी रूपों के दर्शन, देखें वीडियो

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Aarti Live Video: 29 साल से माँ छिन्नमस्तिका उत्सव समिति प्रदेश भर की प्रतिमाएं कर रही विराजमान

पूनम सोनी/होशंगाबाद। जम्मू कश्मीर, कनार्टक, बंगाल, तमिलनाडु सहित प्रदेश भर की अलग-अलग देवियों के दर्शन नवरात्रि के दौरान नर्मदानगरी में होते हैं। शहर में माँ छिन्नमस्तिका उत्सव समिति (Maa Chinnamastika Utsav Samiti) 29 साल से मध्यप्रदेश की अलग-अलग शहरों की प्रतिमाएं विराजमान कर रही है। दरअसल माँ छिन्नमस्तिका देवी (Chinnamastika Devi) की दसों महाविद्याओं में से एक है। ठीक इसी तरह 53 रूप की तांत्रिक विद्याओं (Tantrik Vidhao) को अब तक विराजमान किया जा चुका है। हर प्रदेश की प्रतिमाओं को उसी शहर से लाया जाता है। समिति सदस्य गोविंदा सैनी (Samiti Member Govinda Seni) ने बताया इस वर्ष श्मशान भैरवी मां (Maa Shamshan Bhairavi)की स्थापना की गई है। इनका निवास स्थान पश्चिम बंगाल (West Bengal) का वीरभूमि (Veerbhumi) जिला है। यहां के तारापीठ श्मशान में श्मशान भैरवी की पूजा होती है। मां की पूजा के लिए ओडिशा (Odisha) से पुजारी आए हैं। उत्सव के दाैरान सुबह 4 बजे से 8 बजे तक विशेष पूजा हाेती है। जगन्नाथपुरी के पंडित गंगाधर दास मां दुर्गा की विशेष पूजा करते हैं। रात 12 बजे तक श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।

इन्होने की थी स्थापना
समिति में विक्रांत चौकसे, राजेन्द्र उपाध्याय, प्रदीप, दिनेश रैकवार, गोविंदा सैनी, जय चौकसे, पप्पू तिवारी सहित अन्य व्यापारी शामिल हैं। समिति सदस्यों ने बताया कि शहर में 1992 में शुरूआत समिति सरंक्षक पंडि़त स्व. कमलेश वैरागी, स्व. कृष्णा बाबा ने की थी। इन्होने छिन्नमस्तिका समिति बनाकर मां छिन्नमस्तिका की स्थापना की। इसमें देवी के करीब 53 रूपों की तांत्रिक प्रतिमाओं को विराजित किया है। हर प्रदेश की प्रतिमाओं को उसी शहर से लाया जाता है।

29 साल में 24 तंत्रसाधना आराध्य देवियों के कराए दर्शन

1992 से 1994 तक- छिन्नमस्तिका माता

1995 से 1997 तक- कामख्या देवी

1998 – कंकाली देवी शहडाेल

1999- मां तारा, पंश्चिम बंगाल तारापीठ

2000- उग्रतारा राेहतास

2001- धूमावती दतिया

2002- भुवनेश्वरी देवी, भुवनेश्वर

2003- षाेडसी माता असम

2004- महाकाली काेलकाता

2005- मां मातंगी

2006- त्रिपुर भैरवी

2007- कमला महारानी असम

2008- विरासनी शहडाेल

2009- 18 भुजी विराट कंकाली शहडाेल

2010- सप्तश्रृंगी नासिक

2011- दक्षिणेश्वर काली काेलकाता

2013- छिन्नमस्तिका माता

2014- मां भद्रकाली वारंगल

2015- मां श्री विद्या उड़ीसा

2016- मां कुटकुट वाहिनी गुजारा

2017- मां मेलाेडी अहमदाबाद

2018- ढाकेश्वरी पश्चिम बंगाल

2019- मां महाप्रतांगरा देवी

2020- मां श्मशान भैरवी

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