किले के पास हुआ शिलालेख का लोकार्पण

राष्ट्रकवि पं. भवानी प्रसाद मिश्र की लिखित कविता सन्नाटा

राष्ट्रकवि पं. भवानी प्रसाद मिश्र की लिखित कविता सन्नाटा
होशंगाबाद। राष्ट्रकवि पं. भवानी प्रसाद मिश्र की याद में जहां उन्होंने बैठकर उक्त कविता लिखी थी आज उसी स्थान पर उस कविता का शिलालेख नगरपालिका परिषद, नर्मदांचल कलमकार और प्रेस क्लब के तत्वावधान में लगाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर अविनाश लावनिया तथा अध्यक्ष एसपी आशुतोष प्रताप सिंह, नपाध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल, साहित्यकार पं. गिरिमोहन गुरू, बैंक उपाध्यक्ष भरत सिंह राजपूत, अधिवक्ता विजयाकदम, डॉ उमेश सेठा, सीएमओ पवन कुमार सिंह, प्रेस क्लब के अध्यक्ष दिनेश शर्मा एवं नपा के पार्षण, नागरिकों की उपस्थिति में कार्यक्रम हुआ।
कलेक्टर ने कहा कि सबसे पहले में नपा को इस जगह की विकास के लिए बधाई देता हूं कि उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य को यथावत रखते हुए इस स्थल का विकास किया है। साहित्य समाज का आइना होता है साहित्य सही दिशा देता है, मेरी जब पदस्थापना इस जिले में हुई तो अनेक लोगों ने मुझे बधाई दी कि आप बहुत अच्छे स्थान पर जा रहे हैं। साहित्यकारों की भूमि है यहां के लोग बहुत अच्छे हैं और साहित्य के प्रति विशेष रूचि रखते हैं। इस माटी में अनेक ख्यातिप्राप्त कवि साहित्यकारों ने जन्म लेकर इस जिले की पहचान में भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में दिलाई है।
एसपी आशुतोष प्रताप सिंह ने कहा कि कविता और साहित्य समाज का आइना है, मैं जहां खड़ा हूं मुझे भान नहीं था। आज उसी स्थान पर बहुत ही आकर्षक एवं ऐतिहासिक स्थल नगरपालिका के प्रयासों से बन गया है। मैंने भी यही सुना था कि सतपुड़ा के घने जंगल शीर्षक कविता भी यहीं लिखी गई थीं। सीएमओ श्री सिंह ने कहा कि जब हमने यह पार्क बनाया था, नपाध्यक्ष की इच्छा थी कि इस पार्क में सन्नाटा का शिलालेख लगाया जाए। उनकी सोच ने आज मूर्त रूप ले लिया है।
नपाध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल ने कहा कि साहित्य जगत में होशंगाबाद जिले को पूरे भारत में ख्याति प्रदान की। हमारा सौभाग्य कि आज इसी स्थान पर बैठकर राष्ट्रकवि पं. भवानीप्रसाद मिश्रा ने सन्नाटा कविता की रचना की थी। बैंक उपाध्यक्ष ने कहा कि नपा ने बहुत अच्छा कार्य किया है, पर्यटन के क्षेत्र में होशंगाबाद में अनेक संभावनाएं। कार्यक्रम में पं. गिरीमोहन गुरू द्वार रचित समीक्षा के नए स्वर पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर मनोहर बड़ानी, रितेश खंडेलवाल साहित्यकार सुभाष यादव, शिवानी सोनी, मुकेश अग्निहोत्री, अनिल अग्रवाल, डॉ उमेश सेठा, मुकेश यादव, माखन मीना, मनीष परदेशी आदि अनेक लोग मौजूद थे।

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