आंधी, पानी और बिजली की रोज की यही कहानी

इटारसी। जरा सी पेड़ की शाखा क्या हिली, बिजली गई। आसमान से पानी की कुछ बूंदें भी बिजली के बर्दाश्त के बाहर है, चाहे शहर कितना भी बर्दाश्त कर ले, विभाग इसे दुरुस्त नहीं कर पा रहा है। पिछली रात का ज्यादातर वक्त फिर लोगों ने आंखों में गुजारा है। क्या शहरी और ग्रामीण, हर आदमी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाने से परेशान है? हरेक जुबां पर यही सवाल है, कि जब सालभर में लगभग आधा दर्जन बार किसी न किसी कारण से मेंटेनेंस होता है तो फिर आखिर ये हालात क्यों बनते हैं?
बिजली बंद है और मेंटेनेंस भरोसेमंद नहीं है। गुरुवार की शाम को मौसम रात करीब 9 बजे के बाद अचानक बदला। हवा तो उतनी तेज नहीं चली कि बिजली चली जाए, परंतु बिजली फिर भी गई। एकाध नहींं आधा दर्जन से अधिक स्थानों के लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर बिजली विभाग को कोसने लगे। फाल्ट होना स्वभाविक है, आखिर मशीन है जो खराब हो सकती है, लेकिन कितनी बार? गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। जमानी फीडर की समस्या हल हो ही नहीं रही है और इससे जुड़े करीब एक दर्जन से अधिक गांव के हजारों लोग परेशान हैं और अपनी इसी पीड़ा को लेकर जल्द ही इन गांवों के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मिलने होशंगाबाद जाने वाला है। बीती रात टाउन फीडर के बाजार, गरीबी लाइन, पीपल मोहल्ला, न्यास के अलावा सूरजगंज तो लंबे समय तक बंद रहा तो बूढ़ी माता सब स्टेशन से जुड़े नाला मोहल्ला, मालवीयगंज, गांधीनगर और अन्य क्षेत्र बिना बिजली कई घंटे रहे। पुरानी इटारसी, खेड़ा, सोनासांवरी नाका की तस्वीर भी इनसे जुदा नहीं थी।
रेलवे के निवासी उबले
रेलवे स्टेशन सहित रेलवे कालोनी के लोग आज सुबह से उबल गए। बिजली कंपनी ने तीन घंटे की घोषित कटौती की थी, मेंटेनेंस के लिए। कालोनी के लोगों के पास कोई चारा नहीं था, सिवाए तकलीफ सहने के। परंतु रेलवे स्टेशन पर जेनरेटर की व्यवस्था भी सीमित जगह के लिए थी। प्रतीक्षालय में यात्री उबल रहे थे। पीड़ा कहें तो उसका निदान नहीं था। केवल कुछ दफ्तरों के लिए रेलवे ने जेनरेटर की व्यवस्था की थी। यात्रियों को तो परेशान होना ही पड़ा है। रेलवे कालोनी तीन बंगला, बारह बंगला और नयायार्ड के निवासी खासे परेशान रहे।

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