इस रास्ते पर खतरनाक स्थिति से हो जाइये सावधान

पेड़ से बिजली का खंभा बांधकर सप्लाई बस स्टैंड के सामने खतरनाक स्थिति में है बिजली का खंभा

पेड़ से बिजली का खंभा बांधकर सप्लाई
बस स्टैंड के सामने खतरनाक स्थिति में है बिजली का खंभा
इटारसी। यदि आप बस स्टैंड के सामने वाली रोड से गुज़रते हैं तो ज़रा सतर्क होकर निकलिए। कहीं, ऐसा न हो कि आप बड़ी दुर्घटना का शिकार हो जाएं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि यहां रोड किनारे एक ऐसा बिजली का खंभा है, जो कभी भी गिर सकता है।
नीचे से पूरी तरह से सड़ चुके इस बिजली के खंभे को गिरने से बचाने के लिए एक तार के ज़रिए समीप के पेड़ से बांधकर रखा है। यदि तेज़ हवा चली तो यह धराशायी भी हो सकता है। पेड़ से बंधा होने के साथ ही यह दो तरफ विद्युत तार की सहायता से खड़ा है। बिजली विभाग को इसके विषय में जानकारी होने के बावजूद यह वर्षों से इसी तरह की स्थिति में है और विभाग के अधिकारी किसी दुर्घटना के इंतज़ार में है।
इस रास्ते पर हो जाइये सावधान
बस स्टैंड के ठीक सामने यह खंभा है जो जमीन से कुछ इंच ऊपर पूरी तरह सड़ चुका है। यह पूरी तरह से हवा में लटका हुआ है, कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि दो हिस्सों में बंट चुके खंभे को बिजली विभाग के कर्मचारियों ने ऊपर से एक तार के ज़रिए रेलवे सीमा में खड़े पेड़ से बांध दिया है तथा पूर्व और पश्चिम की तरफ सप्लाई के तार इसे सहारा देकर गिरने से बचाते हैं। दक्षिण की ओर रोड है और यदि पेड़ तेज़ हवा से हिला या पेड़ से बंधा तार टूटा तो दुर्घटना होना निश्चित है। ऐसे में राहगीरों की जान पर बन आएगी।
विभाग है पूरी तरह लापरवाह
इस खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके खंभे की जानकारी बिजली कंपनी के आला अधिकारियों को भी है, बावजूद इसके इस खंभे को बदलने की जेहमत कोई क्यों नहीं उठा रहा, यह बात समझ से परे है। आश्चर्य तो इस बात का है कि खंभा इस स्थिति में अभी कुछ दिन पहले से नहीं बल्कि कई वर्षों से है। अधिकारी भी मानते हैं कि यह खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है, यह स्थिति कई वर्षों से है, लेकिन, जिन अफसर को यह जानकारी है, वे यहां से स्थानांतरित हो गए थे। उनके बाद किसी अफसर ने इसे बदलने की जेहमत नहीं उठायी।
इनका कहना है…।
हां, जब मैं यहां एई था, तब से यह खंभा है। मैंने बदलने के लिए प्रयास शुरु किए थे लेकिन स्थानांतरण हो गया। अब मैं पुन: वापस आया हूं, मैंने खंभे को देख लिया है, जल्द ही उसे बदला जाएगा।
समीर शर्मा, उपमहाप्रबंधक मप्र मक्षेविवि कंपनी

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