कंडे से चिता जलाने का प्रयोग सफल

शांतिधाम समिति ने अपनाया शवदाह का नया तरीका

शांतिधाम समिति ने अपनाया शवदाह का नया तरीका
इटारसी। शांतिधाम में कंडे से चिता जलने का आज से श्मशान में पहला प्रयोग किया जो सफल रहा है। दरअसल लकड़ी नहीं मिलने के बाद शांतिधाम समिति ने यह प्रयोग किया और इसके सफल होने से आगे भी इस तरह से शवदाह का निर्णय लिया है। यह प्रयोग किफायती भी है, क्योंकि लकड़ी की लागत से भी कम लागत में कंडे से शवदाह हुआ है। अभी तक श्मशान घाट पर शव का अंतिम संस्कार लकडिय़ों से किया जाता है और कंडे की संख्या मात्र नाम की रहती है, लेकिन सोमवार को शान्तिधाम में शवदाह बिना लकड़ी के कंडों से किया गया।
आईएसओ प्राप्त शांतिधाम में समिति ने आज कंडे से शवदाह करने का पहला प्रयोग किया। कंडे की चिता पर स्व. सकुन बाई मेहरा पति अशोक मेहरा निवासी नाला मोहल्ला का अन्तिम संस्कार किया। कंडे से चिता जलाने का शान्तिधाम समिति का ये पहला प्रयोग शत प्रतिशत सफल रहा है। समिति इस नए प्रयोग को आगे भी लागू करने का प्लान कर रही है।
शान्तिधाम के संयोजक पत्रकार प्रमोद पगारे का कहना है कि कंडा पवित्र है, इससे चिता जलाने पर वातावरण की शुद्धि होती है। औसतन एक चिता में 5 से 7 क्विंटल तक लकड़ी लगती है, जिसकी कीमत लगभग 4 हजार रुपए है। परिवहन खर्च अलग। आधे खर्च में बिना लकड़ी के कंडे से अंत्येष्टि आसानी से हो जाती है।

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