खुला-खुला सा रहा था इटारसी का बाज़ार बंद

इटारसी। व्यापारिक संगठनों ने जीएसटी के विरोध में इस माह तीसरी बार बाज़ार बंद का आह्वान किया। बंद में हर बार की तरह राजनीति को दूर रखने का प्रयास किया जाता रहा है लेकिन व्यापारी नेताओं के उद्बोधन में हमेशा से राजनीतिक तीरंदाजी स्पष्ट दिखती रही है। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ। एक खास बात यह भी दिखी कि इस बार भी हर बार की तरह आंदोलन की बागडोर कांग्रेसियों के हाथों में ही रही और भाजपा से जुड़े व्यापारी अगली पायदान पर नेतृत्व करते नहीं दिखे। सुबह से सनमुखदास चेलानी दिखे लेकिन, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा जाने लगा तो वे भी उठकर दाएं-बाएं हो गए। कुल जमा आज के बंद में भी व्यापारिक एकता दिखाने का असफल प्रयास किया गया। बंद की जहां तक बात है, इसे सफल इसलिए भी माना जा सकता है कि बंद से पूर्व ही घोषणा कर दी गई थी कि चाय-नाश्ता, मेडिकल, सब्जी-फल जैसी दुकानें इससे मुक्त रहेंगी। स्वभाविक है कि बाजार बंद सा तो बिलकुल नहीं दिखा। अलबत्ता सुबह के वक्त जब बाजार खुलता ही नहीं है, तब ज्यादातर दुकानें बंद थीं तो कुछ ने अपनी दुकानें ही देरी से खोली। कुल जमा आज का बंद, बंद कम खुला अधिक लग रहा था। व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने जयस्तंभ पर जीएसटी के खिलाफ अपने उद्गार व्यक्त किए।

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