जिसे लापता समझ रहे थे, उसकी हो चुकी मौत

डेढ़ माह से लापता आरक्षक की मौत के मामले में हड़कंप

डेढ़ माह से लापता आरक्षक की मौत के मामले में हड़कंप
इटारसी। बीते करीब डेढ़ माह से भी अधिक समय से जीआरपी में पदस्थ आरक्षक बच्चाराम यादव 55 वर्ष को जीआरपी और उसके परिजन लापता मानकर चल रहे थे, लेकिन जब यह खुलासा हुआ कि उसकी मौत हो चुकी है तो जीआरपी में हड़कंप मच गया। खुलासा भी बच्चाराम के परिजनों के आने के बाद उनकी खोजबीन से ही हुआ है। होशंगाबाद पुलिस थाने में उसका शव मिलने के बाद मर्ग कायम था।
जीआरपी थाना प्रभारी बीएस चौहान के अनुसार जीआरपी इटारसी थाने में पदस्थ आरक्षक 614 बच्चाराम यादव 55 वर्ष 15 अप्रैल को बीमार होने पर जिला अस्पताल होशंगाबाद में भर्ती कराया गया था। वह वहां दो दिन भर्ती रहा और वहां से अपनी मर्जी से जाने का कहकर चला गया। इसके बाद 17 अपै्रल को होशंगाबाद पुलिस को जिला अस्पताल परिसर में लावारिस हालत में उसकी लाश मिली थी। उस वक्त अस्पताल के बाहर अज्ञात शव मिलने पर कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच में लिया था। श्री चौहान के अनुसार जिस वक्त उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया था, उसके परिजनो को भी सूचना दी थी, तब वे किसी कारण से आ न सके थे।
कुछ दिन पूर्व जब वे आए तो पता लगा कि बच्चाराम यादव अपने घर भी नहीं पहुंचा है। इसके बाद विभाग और उसके परिजनों ने उसे लापता समझकर खोज शुरु की।
इस बीच 7 जून को आरक्षक के बेटे ने तलाश करने के दौरान होशंगाबाद थाने के मर्ग रजिस्टर में अपने पिता की फोटो देखी तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद जीआरपी में हड़कंप मच गया है। मामले में अब होशंगाबाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
इनका कहना है…!
हमने उसकी तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल में 15 अप्रैल को भर्ती कराया था, इसके बाद वह 17 अप्रैल को अस्पताल से मर्जी से छुट्टी लेकर कहीं चला गया था। उसके परिजनो के आने के बाद पता चला कि वह लापता है। बाद में होशंगाबाद थाने में मर्ग देखकर पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है।
बीएस चौहान, थाना प्रभारी जीआरपी

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