तपते सूर्य का साइंस समझाया विज्ञानवाणी ने

तपते सूर्य का साइंस समझाया विज्ञानवाणी ने

इटारसी। हर साल 21 मार्च को होने वाले खगोलीय घटना इक्वीनॉक्स की स्थिति में सूर्य की किरणें भोपाल से लगभग 2500 किमी दूर स्थित भूमध्यरेखा के पास तो सीधी पड़ रही है, लेकिन मध्यप्रदेश के भोपाल, होशंगाबाद आदि शहरों में सूर्य की किरणों का झुकाव कितना है। यह जानने के लिये इटारसी रेलवे स्टेशन के साइंस प्वाइंट पर दोपहर में एक प्रयोग किया। इसमें दोपहर 12 से 12:30 के बीच एक रॉड की परछाई को नापकर सूर्यकिरणों के कोण को मापा। प्रयोग के दौरान पाया गया कि यह लगभग 68 डिग्री है। अर्थात इस समय शहर पर किरणें सीधी नहीं पड़ रही है। इसके साथ ही एक धागे और कॉटन बॉल की मदद से हवा की उपस्थिति का अनुमान लगाया। लेकिन हवा का बहाव न के बराबर पाया गया।
विज्ञान वाणी केंद्र के डायरेक्टर राजेश पाराशर ने बताया कि बच्चों में अवलोकन क्षमता बढ़ाने के लिये प्रयोग किया। राजेश पाराशर ने बताया इस समय भारत के किसी भी शहर पर सूर्य की किरणें सीधी नहीं पड़ रही हैं। सूर्य की किरणें 12 अप्रैल को सबसे पहले त्रिवेंद्रम में सीधी पड़ेगी तो उत्तर दिशा में बढ़ती हुई 5 जूून को होशंगाबाद में और 15 जून को भोपाल में ये किरणें एकदम सीधी होंगी। आप अगर दोपहर में 12 बजे धूप में निकलते हैं तो अपनी परछाई की प्रतिदिन घटती लंबाई को देखकर सूर्य की किरणों को सीधा होते महसूस कर सकते हैं। इसके साथ ही वर्तमान में दिन की अवधि है 12 घंटे 21 मिनट है जो 21 जून तक प्रतिदिन बढ़ते हुये 13 घंटे 34 मिनट हो जायेगी। प्रयोग से विद्यार्थियों ने यह निष्कर्ष निकाला इस स्थिति में भीषण गर्मी का कारण सूर्य का 2500 किमी दूर भूमध्यरेखा पर आना एक मात्र कारण नहीं है। भीषण गर्मी का एक कारण हवा की गति एवं दिशा, हिमालय की तरफ से आने वाली हवा की कमी जैसे अनेक कारणों का संयुक्त प्रतिफल है। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी में पश्चिम से आने वाली गर्म हवा का बड़ा योगदान है।
सूर्य की किरणें कब पड़ेंगी एकदम सीधी

12 अप्रैल त्रिवेंद्रम
23 अप्रैल मैसूर
25 अप्रैल बैंगलुरू
27 अप्रैल तिरूपति
10 मई हैदराबाद
21 मई नासिक
27 मई नागपुर
5 जून होशंगाबाद
15 जून भोपाल

इनका कहना है…!
सूर्य किरणों का एंगिल सीधे तौर पर सोलर रेडियेशन की तीव्रता को निर्धारित करता है। दिन की अवधि सोलर रेडियेशन की अवधि को तय करती है। ये दोनों मिलकर किसी शहर पर सूर्य की कितनी गर्मी मिलेगी को तय करते हैं।
राजेश पाराशर

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